कटंगी रोड पर ठेकेदारों की मनमानी!

 

इन दिनों सिवनी में कटंगी रोड, यहाँ पर काम करवाने वाले ठेकेदारों के लिये प्रयोगशाला की तरह उपयोग में लायी जा रही है जिसके कारण आवागमन जमकर प्रभावित हो रहा है। ऐसे ठेकेदारों की मनमानी कार्यप्रणाली पर लगाम न लगाये जाने को लेकर ही मेरी शिकायत है।

इन दिनों एक तरफ जहाँ सड़क निर्माता ठेकेदार के द्वारा अपने कार्य को अंजाम दिया जा रहा है वहीं रेलवे के लिये भी ठेकेदार के द्वारा पुल का निर्माण करवाया जा रहा है। सड़क निर्माता ठेकेदार के द्वारा इन दिनों नव निर्मित सड़क के दोनों ओर चेकर्स लगाये जा रहे हैं और इसका कार्य अत्यंत धीमी गति से चल रहा है।

आपत्तिजनक बात यह है कि इस ठेकेदार के द्वारा चेकर्स बुलवाये जाकर सड़क पर ही रखवा दिये गये हैं जिसके कारण वाहन चालकों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सड़क पर जगह-जगह विभिन्न समूहों में रखवाये गये ये चेकर्स रात के समय वाहन चालकों को आसानी से नजर नहीं आते हैं जिसके कारण इन चेकर्स के समूहों से टकराकर किसी गंभीर दुर्घटना की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है।

ठेकेदार को चाहिये कि वह सबसे पहले तो इन चेकर्स को सड़क से हटवा दे ताकि यह सड़क वाहन चालकों के लिये निर्बाध रूप से खुली रहे। निर्माण कार्य की गति इतनी धीमी है कि ये चेकर्स कई दिनों से सड़क पर रखवा दिये जाकर दुर्घटनाओं को जन्म देते दिख रहे हैं। बहुत ही ज्यादा आवश्यकता है तो इन चेकर्स के आसपास कम से कम रेडियम से रंगे हुए सूचना बोर्ड लगवा दिेय जायें ताकि रात के अंधेरे में वाहन चालक दूर से ही सतर्क होकर वाहन का चालन कर सके।

अभी हो यह रहा है कि अचानक चेकर्स के समूहों पर नज़र पड़ने के कारण वाहन चालक के द्वारा एकाएक अपने वाहन की दिशा बदल दी जाती है जिसके कारण कई बार वहाँ से पैदल गुजर रहे राहगीरों की जान पर बन आती है। हो सकता है दुर्घटनाओं से सड़क निर्माता ठेकेदार को ज्यादा लेना-देना न हो लेकिन संबंधित विभागों को नागरिकों की सुरक्षा को लेकर जरूर कदम उठाना चाहिये और ठेकेदार को चेतावनी दी जाना चाहिये कि उसके द्वारा इस कार्य को सही तरीके से संपादित किया जाये।

इसी तरह पुराने कटंगी नाका क्षेत्र में इन दिनों ब्रॉडगेज़ के लिये पुल का निर्माण कार्य किया जा रहा है। इस निर्माण के लिये ठेकेदार के द्वारा डायवर्शन तो दे दिया गया है लेकिन इस डायवर्टेड मार्ग को शुरू से ही जीर्ण शीर्ण अवस्था जैसा बनाया गया है। इस पर डामर का लेप तो चढ़ाने की आवश्यकता भी ठेकेदार के द्वारा नहीं समझी गयी और बारिश के दिनों में हालत यह हैं कि इस डायवर्टेड मार्ग पर गड्ढे उभर आये हैं जिसके कारण वाहन चालकों, विशेषकर साईकिल चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है और इनमें भी सबसे ज्यादा छात्राएं हैं जो जैसे तैसे इस मार्ग से होकर गुजरतीं हैं।

इस पुल के निर्माण कार्य की गति भी अत्यंत धीमी है इसलिये आवश्यकता इस बात की है कि डायवर्टेड मार्ग को नियमानुसार बनाया जाये और इस स्थल पर रेडियम का भी समुचित उपयोग किया जाये। अभी रेडियम का ज्यादा उपयोग न किये जाने के कारण इस क्षेत्र से गुुजरने वाले अपेक्षाकृत नये वाहन चालकों को दूर से दिखायी ही नहीं देता है कि आगे चलकर उसे डायवर्टेड मार्ग से गुजरना होगा। इसके चलते भी दुर्घटनाओं की संभावनाएं बनती दिखतीं हैं। जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि ऐसे लापरवाह ठेकेदारों की कार्यप्रणाली को दुरूस्त करने की दिशा में कड़े कदम अविलंब उठाये जायें जिन्होंने इस क्षेत्र को अपनी अनोखी प्रयोगशाला बनाकर रख दिया है।

आलोक अग्निहोत्री