तहसीलदार का आदेश पालन करवाने में आ रहा पसीना!

 

 

प्रस्तावित सड़क ही बेच दी भूमाफिया ने! भू माफियाओं की दबंगाई से सरकारी भूमि का रकबा हो रहा कम!

(सादिक खान)

सिवनी (साई)। जिले में भू माफियाओं के कारनामों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। एक मामले में तो भू माफियाओं के द्वारा प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के प्रस्तावित स्थान को ही बेच दिया गया है। यहाँ तक कि तहसीलदार न्यायालय के आदेश का पालन करवाने में राजस्व विभाग को पसीना आता दिख रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार छिंदवाड़ा मार्ग पर जिले की सीमा से लगे छिंदवाड़ा जिले के खमरिया से सिवनी जिले के कोहका होकर मुंगवानी तक के हिस्से में एक सरकारी रास्ता हुआ करता था। यहाँ से होकर नेनेपार, कमकासुर, ढाना, मड़वा, भाटीवाड़ा, पीपरडाही रेल्वे स्टेशन आदि ग्रामों से होकर आगे तक मार्ग बनवाना प्रस्तावित था।

उक्त संबंध में ग्रामीणों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इस प्रस्तावित मार्ग पर ग्राम कोहका में पटवारी हल्का नंबर 119, राजस्व निरीक्षक मण्डल सिवनी 01 के खसरा नंबर 530 में कुल रकबा 1.770 हेक्टेयर जो कि शासकीय रास्ता था को सरपंच, सचिव, पटवारी एवं ग्राम कोटवार की मिली भगत से बेच दिया गया है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस जगह को खरीदकर दबंगों के द्वारा यहाँ निर्माण करवाया जाकर इस सड़क का अस्तित्व ही समाप्त कर दिया गया है। मज़े की बात तो यह है कि जहाँ सड़क प्रस्तावित थी उस स्थान पर कब्ज़ा करने वालों को बिजली के कनेक्शन भी मिल चुके हैं।

इसके साथ ही ग्रामीणों ने कहा कि उनके द्वारा वर्ष 2016 से आज तक लगातार ही इसकी शिकायत जिला प्रशासन से की जा रही है। इसके बाद तहसीलदार सिवनी के न्यायालय के द्वारा पिछले साल 18 मई को आदेश जारी कर दस कब्ज़ेदारों को बेदखल कर दो-दो हजार रूपये का अर्थदण्ड भी सुनाया गया था।

बताया जाता है कि तहसीलदार न्यायालय के द्वारा दिये गये आदेश के एक साल बाद एक बार फिर तहसीलदार के द्वारा 14 जून को एक आदेश जारी कर कब्जेदारों को बेदखल करने के आदेश देते हुए 20 जून को तहसीलदार न्यायालय में जानकारी देने के निर्देश दिये थे।

ग्रामीणों की मानें तो सरकारी भूमि पर कब्जा करने वाले अतिक्रमण करने वालों का रसूख इतना बुलंद है कि 20 जून तो छोड़िये 29 जुलाई तक भी इनके कब्ज़े यथावत बने हुए हैं। ग्रामीणों ने कहा कि तहसीलदार के आदेश का पालन करवाने में ही राजस्व विभाग के अधिकारियों को पसीना आता दिख रहा है।