ग्रामीण अंचलों में है अस्पताल मित्र की आवश्यकता!

 

 

रात तीन बजे टॉर्च की रौशनी में हुआ भिलाई में प्रसव

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। जिला अस्पताल में अस्पताल मित्र योजना का आगाज़ किया जा रहा है, जबकि अस्पताल मित्र योजना की दरकार जिले की सीएचसी, पीएचसी और उप स्वास्थ्य केंद्र को है। सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील के भिलाई में स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र में टॉर्च की रौशनी में प्रसव करवाया गया।

उप स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी एएनएम बेला पुषाम ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान बताया कि बीती रात ग्राम खमदेही निवासी सीमा पति मनोज झारिया को प्रसव के लिये भर्त्ती करवाया गया था। उन्होंने कहा कि चूँकि अस्पताल की लाईट काट दी गयी थी इसलिये प्रसव को कृत्रिम रौशनी में करवाना पड़ा।

इस मामले की गूंज जब सोशल मीडिया पर वायरल हुई तब लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगीं। लोगों का कहना था कि जिला अस्पताल में जनरेटर सहित सारी सुविधाएं हैं, इसलिये अस्पताल मित्र योजना की कवायद जिला चिकित्सालय की बजाय सुदूर ग्रामीण अंचलों में स्थित सुविधा विहीन अस्पतालांे के लिये की जाना चाहिये।

बहरहाल, तहसील मुख्यालय घंसौर से लगभग 18 किलोमीटर दूर स्थित भिलाई के उप स्वास्थ्य केंद्र में देर रात भर्त्ती हुई प्रसूता की हालत को देखते हुए एएनएम के द्वारा उन्हें तत्काल ही प्रसव करने की सलाह दी गयी। यहाँ उल्लेखनीय होगा कि इस अस्पताल में एक भी चिकित्सक पदस्थ नहीं है। इसी बीच एक अन्य प्रसूता भी आयी जिसे घंसौर भेज दिया गया।

बताया जाता है कि इसके उपरांत प्रसूता के पति को रौशनी का इंतजाम करने को कहा गया। उनके पति के द्वारा अपने साथ लायी गयी टॉर्च से ही रौशनी दिखायी गयी तब जाकर रात तीन बजे के आसपास प्रसव करवाया गया। बेला पुषाम की मानें तो इस उप स्वास्थ्य केंद्र में हर माह 18 से 20 प्रसव करवाये जाते हैं।

एनएनएम ने आगे बताया कि अप्रैल माह में उप स्वास्थ्य केंद्र का बिजली का बिल 1800 रूपये आया था। उन्होंने इसमें से 1000 रूपये की राशि भर दी थी। उन्होंने बताया कि वे स्वयं संविदा पर हैं, इस लिहाज़ से उनका वेतन भी ज्यादा नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा इस मामले की जानकारी घंसौर बीएमओ को दे दी गयी थी।

बेला पुषाम की मानें तो इस माह उप स्वास्थ्य केंद्र का बिजली का बिल 35 हजार रूपये आया है। उन्होंने बीएमओ डॉ.विजेंद्र चौधरी को देयक भेजा तो बीएमओ ने कहा कि इतना पैसा वे कहाँ से भरेंगे। इसके चलते सोमवार की शाम ही उप स्वास्थ्य केंद्र की लाईट काटी जाकर यहाँ अंधेरा कर दिया गया था।

यहाँ यह उल्लेखनीय होगा कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से महज़ बीस मीटर दूर स्थित आईपीपी 06 पर सेवा निवृत्त चिकित्सक डॉ.आर.के. श्रीवास्तव ने अब तक कब्जा जमाया हुआ है। वे यहाँ के एयर कण्डीशनर का उपयोग सालों से कर रहे हैं। यहाँ लाखों रूपयों का बिल सीएमएचओ कार्यालय के द्वारा भरा जा रहा है पर जहाँ वास्तव में दरकार है उस ओर सीएमएचओ कार्यालय के द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

लोगों का कहना है कि जिला अस्पताल की शानदार बिल्डिंग में रंग रोगन और टाईल्स आदि लगाने के लिये अस्पताल मित्र योजना का आगाज़ किया गया है। यहाँ लगभग ढाई करोड़ रूपये की राशि व्यय कर अस्पताल का कायाकल्प किये जाने की योजना है। पर सुदूर ग्रामीण अंचलों में जहाँ वास्तव में इन सबकी दरकार है उस ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।

इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के द्वारा झोला छाप चिकित्सकों की मश्कें कसने के लिये लगातार ही विज्ञप्तियां जारी की जा रही हैं और आदेश भी जारी हो रहे हैं पर कार्यवाही सिफर ही है। यक्ष प्रश्न यही है कि इस उप स्वास्थ्य केंद्र जैसे अस्पतालों में प्रसव के उपरांत प्रसूता और नौनिहाल को अगर दवाओं की जरूरत पड़ती है तो उन्हें दवाएं कौन लिखता है! क्या एएनएम दवाएं लिखने के लिये अधिकृत हैं!

मैं अपनी पत्नी को रात में अस्पताल लेकर गया था. यहाँ पर लाईट न होने के कारण मेरी टॉर्च की रौशनी में प्रसव करवाया गया.

मनोज झारिया,

प्रसूता का पति.

अस्पताल का बिल काफी ज्यादा आया था जिसे भर पाना मेरे बस की बात नहीं थी. मैंने अधिकारियों को बिल की जानकारी दे दी थी. सोमवार की शाम विद्युत कर्मियों ने लाईट काट दी थी.

बेला पुषाम, एएनएम,

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भिलाई.

केंद्र का बिजली बिल पिछले डेढ़ साल से जमा नहीं किया गया है. ऐसे में कर्मचारियों पर भी वसूली का दबाव रहता है, इसलिये अस्पताल की लाईन काट दी गयी है.

मनोज ठाकरे उपयंत्री,

बिजली विभाग.