जाते-जाते चांद को रोशन कर जाता है सूरज

 

 

(प्रणव प्रियदर्शी)

भले आप सूर्यास्त के आदी हो गए हों और इसे रोज की जिंदगी का अनिवार्य ही नहीं कई मामलों में उपयोगी हिस्सा भी मानने लगे हों, लेकिन अंधेरे और उजाले के बीच छिड़ी जंग से जो वाकिफ हैं वे जानते हैं कि दोपहर की चमचमाती धूप के बीच भी कैसे सूरज का चेहरा फीका पड़ने लगता है, जब उसे अपनी लगातार कम होती ताकत का अहसास होता है। दुनिया में उसकी रोशनी का डंका बज रहा होता है, पर उसे पता पड़ जाता है कि रात के खिलाफ छेड़ी गई यह लड़ाई वह हारने ही वाला है। हर बीतता हुआ पल उसकी कमजोर पड़ती धमक का एलान होता है और दूर कहीं अंधेरों के बीच बैठी रात के चेहरे की उम्मीद बढ़ाता जाता है। सूरज भले पूरी दुनिया की तरफ से लड़ रहा हो, पर दुनिया अपने में मगन होती है। बल्कि, दुनिया का एक हिस्सा ऐसा होता है जो सूरज के कम होते ताप पर राहत ही महसूस करता है कि चलो आखिर लड़ाई तो बंद हुई। अंधेरे से अपनी दुश्मनी के चक्कर में सूरज ने हमारा जीना ही मुहाल कर दिया था।

शांति की संभावना से उत्साहित दुनिया का यह हिस्सा जैसे सूरज की मौत का जश्न मनाने निकल पड़ता है। चिड़ियों का शोर बढ़ जाता है। बच्चे मैदानों में खेलते दिखने लगते हैं। सूरज क्या बोले इन सब पर! जो लोग अन्यायपूर्ण शांति और इंसाफ की जंग के बीच अपना भला-बुरा नहीं पहचान पाते, उनसे क्या शिकायत! ऐसे लोग अफसोस इस बात पर जताते हैं कि गांव, शहर, जंगल से अंधेरा भगाने की कोशिशों के बाद भी सूरज इनके दिलो-दिमाग में बैठे उस अंधेरे को दूर नहीं कर पाया जिसे रात अपनी निशानी के तौर पर छोड़ गई थी। ये समझते हैं कि अंधेरों से सूरज की कोई निजी दुश्मनी है। अपनी पूरी हस्ती जलाकर वह इनकी जिंदगी रोशन कर रहा होता है पर ये इसी बात पर खुश दिखते हैं कि उसकी आंच कम हो रही है।

सूरज की जगह हम-आप होते तो टूट जाते। छोड़ो इन नामाकूलों को। मरने दो अपनी मौत। मैं क्यों तिल-तिल जलूं इनके लिए, जब इन्हें ही अपनी नहीं पड़ी है। मगर साहब, दुनिया रोशन करना इतना ही आसान होता तो शायद हम-आप भी हिम्मत कर लेते। वह राह बड़ी कठिन है। कबीर कह गए हैं- जो घर जारै आपना चले हमारे साथ। सूरज तो अपना सब कुछ आग के हवाले कर इस राह पर बढ़ा है। रात की साजिश का शिकार बने ये बेचारे लोग उसके मनोबल को क्या तोड़ पाएंगे। इन पर संजीदगी से मुस्कराते हुए वह दुनिया से विदा लेता है, लेकिन जाते-जाते चांद को रोशन कर जाता है, ताकि नई ताकत जुटाकर उसके वापस आने तक अंधेरे के खिलाफ जारी इस जंग का सिलसिला टूट न जाए।

(साई फीचर्स)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *