अगस्त माह के त्यौहारों की फेहरिस्त

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। अगस्त महीने की शुरुआत श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या के साथ हो रहा है। इस महीने के 15 दिन श्रावण के होंगे जबकि 15 दिन भाद्रपद के। इन दिनों कई बड़े व्रत त्यौहार देश में मनाये जाते हैं जिनका धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक रूप से काफी महत्व है।

हरियाली अमावस (गुरुवार 01 अगस्त) श्रावण मास की अमावस्या को पड़ेगी। हरियाली अमावस्या के नाम से ही जाना जाता है। सावन के महीने में बारिश होने के कारण प्रकृति का सौंदर्य अपने चरम पर होता है। इसलिये कहा जाता है कि इस दिन प्रकृति का महत्व समझते हुए हर किसी को पौधरोपण करना चाहिये।

हरियाली तीज (शनिवार 03 अगस्त) : श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज व्रत धूमधाम से मनाया जाता है। सुहागन स्त्रियों के लिये इस व्रत का काफी महत्व है। इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। हरियाली तीज के मौके पर नयी नवेली दुल्हन के मायके से नये वस्त्र, सुहाग सामग्री, मेंहदी और मिठाई आने की परंपरा रही है। मधु श्रावणी व्रत बिहार के मिथिला का प्रमुख त्यौहार है।

नाग पंचमी (सोमवार 05 अगस्त) : सनातन धर्म में सांप को देवता के रूप में पूजा जाता है। इनका मूल निवास पाताल लोक माना जाता है। प्राचीन काल से ही नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा की जाती रही है जिसका उल्लेख भविष्य पुराण में किया गया है। नाग पंचमी का त्यौहार श्रावण मास की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। भविष्य पुराण में कहा गया है कि नाग पंचमी के दिन धान का लावा और दूध अर्पित करने से नागों की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

पवित्रा एकादशी (रविवार 11 अगस्त) : सावन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा या पवित्रा एकादशी भी कहते हैं। जैसा कि इसके नाम से पता चलता है कि इस एकादशी का व्रत संतान प्राप्ति के लिये किया जाता है। इस दिन पति और पत्नी जोड़े से व्रत रखते हैं और संतान प्राप्ति के लिये भगवान विष्णु की पूजा करते हैं तो संतान प्राप्ति में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।

रक्षा बंधन, श्रावण पूर्णिमा (गुरुवार 15 अगस्त) : भाई और बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व रक्षा बंधन हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा वाले दिन आयोजित किया जाता है। रक्षा सूत्र को बांधने के लिये ज्योतिष शास्त्र के अनुसार निर्धारित समय का अनुसरण किया जाता है। रक्षा बंधन केवल धागों का त्यौहार नहीं है, बल्कि यह प्यार, विश्वास और रिश्तों की गरिमा बनानेवाला पर्व है।

कजलियां (रविवार 18 अगस्त) : काजली तीज (कजलियां) भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनायी जाती है। इसे सातुड़ी या बड़ी तीज भी कहा जाता है इस दिन कन्याएं व सुहागन व्रत रखकर संध्या को नीमड़ी की पूजा करतीं हैं। कन्याएं सुंदर व सुशील वर तथा सुहागन पति की दीर्घायु की कामना करतीं हैं। वे तीज माता की कथा सुनतीं हैं।

श्री गणेश (बहुला चतुर्थी) (सोमवार 19 अगस्त) : भाद्रपद के कृष्णपक्ष की चतुर्थी के दिन बहुला चतुर्थी का व्रत रखने का विधान है। इस व्रत को पुत्रवती महिलाएं रखती हैं। वे पूरा दिन व्रत रखने के बाद शाम को बछड़े वाली गाय की पूजा करती हैं और पूजन के बाद भोजन करतीं हैं। ऐसी मान्यता है कि सिद्धि विनायक का व्रत रखने से गणपति प्रसन्न हो जाते हैं और साधकों के सभी विघ्न दूर करते हैं।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (शुक्रवार 23 अगस्त और शनिवार 24 अगस्त) : भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव का यह त्यौहार भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में सनातन धर्म को मानने वाले श्रद्धा के साथ मनाते हैं। इस दिन भगवान कृष्ण के भक्त व्रत रखते हैं और रात बारह बजे उनके जन्म के साथ ही विधि विधान से उनका पूजन कर व्रत समाप्त करते हैं। इस दिन कृष्णाष्टकम् आदि स्तोत्र का पाठ करते हुए भगवान कृष्ण का स्मरण करना चाहिये। रात्रि में ठीक 12 बजे उनके जन्म के बाद फिर से उनका विशेष पूजन और अर्चन करते हुए व्रत समाप्त कर लेना चाहिये।