चलें महापुरूषों के पदचिन्हों पर : चंदेल

 

प्रेमचंद जयंति पर हुई संगोष्ठी

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। किसी महापुरूष की जयंति हम इसलिये मनाते हैं जिससे हम उनके पदचिन्हों पर चलकर हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकें। पं.धनपत राय को प्रेमचंद के नाम से कथा सम्राट के रूप में विश्व स्तर पर हिन्दी के योगदान के लिये ख्याति मिली।

उक्त उदगार प्रेमचंद जयंति के अवसर पर कन्या महाविद्यालय में प्राचार्य डॉ.अर्चना चंदेल ने व्यक्त किये। उन्होंने भारत की दशा एवं दिशा को लेकर अपनी कलम चलायी और हिन्दी साहित्य को ऊँचाईयां प्रदान कीं। उनकी लिखी हुईं गोदान, कर्मभूमि, मंगलसूत्र सहित अनेकों कृति हैं जो हमें भारतीय संस्कृति से अवगत कराती हैं।

इस अवसर पर डॉ.शाहेदा खान ने कहा कि किसी भी महापुरूष की अच्छाईयों को ग्रहण करना तथा उनके बताये आदर्शाें को अपने जीवन में उतारकर उसे अपने जीवन में अंगीकार करना जयंति मनाने का उद्देश्य होता है। प्रोफे.कल्पना इंगले ने बताया कि उनकी लिखी र्हुइं कहानियां हमें जीवन में प्रेरणा देती हैं, पवन नाग ने उनके सदभाव एवं अंग्रेजी शासन काल में किये गये लेखन पर विस्तार से अपनी बात रखी।

इस अवसर पर बीए की अंजली कुसाने ने प्रेमचंद के जीवन पर अपनी बात रखी। इसी तरह हेमलता उईके, आरती नाथ ने भी जीवन परिचय प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में चेतना डहेरिया, अर्पणा अवस्थी, हेमराज नागवंशी, शकीना शेख आदि ने भी अपनी बात रखी। इस दौरान समीक्षा के रूप में डॉ.अर्चना चंदेल ने विस्तार से अपनी बात रखी। आभार व्यक्त डॉ.शाहेदा खान ने किया।