सट्टे की अघोषित मण्डी बना सिवनी!

 

 

पुलिस की अनदेखी के चलते फल फूल रहा सट्टा व्यवसाय!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। सिवनी शहर में सट्टे का व्यवसाय जमकर फल फूल रहा है। कोतवाली पुलिस की मुस्तैदी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों डूण्डा सिवनी पुलिस के द्वारा सट्टा क्वीन के नाम से मशहूर लता बाई के घर पर छापा डलवाना पड़ा था। अब नगर कोतवाल बदल गये हैं तब उम्मीद की जा सकती है कि शहर में सट्टे पर रोक लग सकेगी।

कोतवाली पुलिस सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि महाराष्ट्र की तर्ज पर सिवनी में भी सट्टा (मटका) का नंबर खोला जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि इंटरनेट पर सट्टा मटका डॉट कॉम पर कुछ शुल्क देकर सिवनी के सट्टा खिलाने वाले अपने खेल का परिणाम घोषित करवा देते हैं।

सूत्रों का कहना है कि इस तरह सिवनी के सटोरियों के द्वारा स्थानीय स्तर पर खिलवाये जा रहे सट्टे को बाहर का खेल बताकर लाखों के वारे न्यारे किये जा रहे हैं। सिवनी में दिन और रात दोनों ही सट्टे का कारोबार जमकर फल फूल रहा है। बुधवारी बाज़ार में ही अनेक स्थानों पर सट्टे का कारोबार चल रहा है।

सूत्रों की मानें तो सिवनी में चार नामों से सट्टे का कारोबार किया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि पुलिस के सूचना संकलन को इस बात की जानकारी नहीं है कि सट्टे के इस धंधे में किस – किस की संलिप्तता है पर इसके बाद भी इनके खिलाफ किसी तरह की कार्यवाही न होना आश्चर्य का ही विषय है।

इधर, लोगों का कहना है कि कम पैसा लगाकर ज्यादा पैसा बनाने की चाह में बड़ी तादाद में युवा वर्ग भी इस सामाजिक बुराई की जद में आ रहा है। चर्चाओं के अनुसार सिवनी में रोज़ ही लाखों रूपये का सट्टा लगाया जाता है। इस खेल में पड़कर अनेक परिवार अब तक बर्बादी के कगार पर जा पहुँचे हैं।

बताया जाता है कि जुए की बड़ी फड़ों की तरह सट्टा खिलाने वाले बड़े सटोरियों के द्वारा अपने अड्डों के आसपास टॉवर (जो पुलिस और खतरे से इन्हें आगाह करते हैं) भी बैठाये जाते हैं ताकि किसी भी विषम परिस्थिति में ये बचकर निकल सकें। शहर की गलियों में सट्टे का व्यापार करने वालों की तादाद दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है।

यह है खेलने का तरीका : बताया जाता है कि इस खेल में शून्य से नौ तक ईकाई, दहाई का अंक लगाने पर एक रूपये के दस रूपये मिलते हैं। इसके अलावा दस से सौ तक का कोई नंबर लगाने पर अगर फंस गया तो 12 रूपये के 100 रूपये मिलते हैं।

बताते हैं कि हर जीत पर रकम का पच्चीस प्रतिशत हिस्सा सट्टा बुक करने वाले के खाते में जाता है। इसके अलावा हार पर भी कुछ इतना ही मिलना तय है। सट्टे के कारोबार में केवल खाईबाज अपना घर भरता है। इस मामले में दशकों से एक कहावत सिवनी में जमकर चलन में है कि नौ (सट्टे का ओपन नंबर नौ बजे आता है) की खाने नहीं नहीं देती और बारह (सट्टे में क्लोज़ का अंक 12 बजे बताया जाता है) की सोने नहीं देती।

नवागत नगर कोतवाल मनोज गुप्ता के द्वारा कार्यभार ग्रहण कर लिया गया है। वे इसके पहले भी सिवनी जिले में तैनात रह चुके हैं, इस लिहाज़ से वे सिवनी की आबोहवा से वाकिफ होंगे ही। लोगों ने उम्मीद जतायी है कि सट्टे के इस कारोबार को समूल नष्ट करने में उनकी महती भूमिका होगी।