क्या हुआ महिलाओं के लिये पृथक शापिंग मॉल का!

 

 

तीन साल पहले महिला एवं युवक काँग्रेस ने की थी माँग

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। शहर में महिलाओं के लिये पृथक शापिंग मॉल बनाये जाने की माँग 2016 के जुलाई माह में युवा एवं महिला काँग्रेस के द्वारा किये जाने के बाद यह मामला ठण्डे बस्ते के हवाले कर दिया गया। वर्तमान में प्रदेश में काँग्रेस की सरकार होने के बाद भी इस मामले में कोई हलचल नहीं दिखायी दे रही है।

ज्ञातव्य है कि जुलाई 2016 में महिला काँग्रेस और युवा काँग्रेस के द्वारा संयुक्त रूप से एक ज्ञापन तत्कालीन जिलाधिकारी गोपाल चंद्र डाड को सौंपा गया था। जिला कलेक्टर को सौंपे गये इस ज्ञापन में कहा गया था कि इस तरह के कॉम्प्लेक्स का निर्माण नगर पालिका द्वारा शहर के मध्य ही स्थल चयनित कर बनाया जाये। इस कॉम्प्लेक्स में दुकानें सिर्फ स्थानीय महिलाओं को इस शर्त के साथ दी जायें कि वे खुद ही इसका संचालन करेंगीं, किसी को इस दुकान को किराये पर नहीं देंगी।

ज्ञापन में कहा गया था कि महिला शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में 50 प्रतिशत दुकानें अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिये आरक्षित की जायें एवं दुकान किराये से या मालिकाना हक के आधार पर ही आवंटित की जायें। संगठनों ने माँग की थी कि दुकानें यदि बेची जाती हैं तो इसके लिये महिलाओं को शासन की योजना के अंतर्गत बैंक ऋण उपलब्ध करवाया जाये।

इसके साथ ही ज्ञापन में कहा गया था कि शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में बुटीक, टेलर, सिलाई कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, रेडीमेड गारमेंट्स से लेकर मोबाईल विक्रय और मोबाईल रिपेयरिंग की दुकानों के अलावा किराना, होटल, फास्ट फूड, आईसक्रीम, लेडीज जूते चप्पल, कॉस्मेटिक्स की दुकानों का अलग – अलग वर्ग बनाया जाये।

ज्ञापन में यह भी कहा गया था कि इसमें विभिन्न प्रकार की दो या तीन दुकानों की संख्या निर्धारित की जाये। इन दुकानों को उन प्रकारों के हिसाब से ही चिन्हित कर बेचा जाये। जैसे रेडीमेट कपड़ों की दुकानों की तीन दुकानों को पृथक से चिन्हित किया जाकर उन दुकानों में इसका व्यवसाय ही करने की अनुमति दी जाये।

महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की दृष्टि से युवा काँग्रेस और महिला काँग्रेस के द्वारा यह माँग की गयी थी कि महिलाओं को मोबाईल रिपेयरिंग, टेलरिंग आदि का प्रशिक्षण भी शासन की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत किया जाये। इसके आलवा शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में महिला सिक्योरिटी गार्ड की तैनाती भी की जाये।

जुलाई 2016 में ज्ञापन सौंपने के बाद जिला काँग्रेस या काँग्रेस के अनुषांगिक संगठनों ने भी इस माँग को मानो बिसार ही दिया है। इसके बाद किसी के भी द्वारा इस मामले में प्रयास करना मुनासिब नहीं समझा गया। और तो और इस मामले को पालिका की साधारण सभा में रखने की जहमत भी काँग्रेस के पार्षदों के द्वारा नहीं उठायी गयी। लोगों का कहना है कि प्रदेश में काँग्रेस के सत्तारूढ़ हुए आठ माह होने के बाद भी महिलाओं के हितों से जुड़े इस मामले में काँग्रेस का मौन आश्चर्य जनक ही है।