होर्डिंग मामले में शासन को जवाब देने पंद्रह दिन की मोहलत

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

जबलपुर (साई)। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने होर्डिंग मामले में राज्य सरकार और नगर निगम को जवाब पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय दे दिया है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश आरएस झा और जस्टिस विजय शुक्ला की युगल पीठ ने मामले की सुनवाई दो सप्ताह बाद नियत की है। होर्डिंग संचालकों की ओर से दायर याचिकाओं में आउटडोर मीडिया एडवरटाइजिंग रूल्स 2017 को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि मीडिया रूल्स बनाने का अधिकार केन्द्र सरकार को है। राज्य सरकार मीडिया रूल्स नहीं बना सकती है।

याचिका में कहा गया है कि मीडिया रूल्स में जरूरत से ज्यादा टैक्स लगाया गया है, जो संविधान द्वारा प्रदत्त व्यवसाय करने के अधिकार के खिलाफ है। याचिकाओं में कहा गया है कि नगर निगम ने संचालकों के खिलाफ भारी-भरकम वसूली निकाली गई है। केन्द्र सरकार ने वर्ष 2017 से जीएसटी लागू किया है, जबकि नगर निगम ने उसके पहले से उन पर जीएसटी लगा दिया है।

याचिका में कहा गया है कि होर्डिंग संचालकों से वर्ष 2017 के बाद जीएसटी के साथ मनोरंजन कर भी लिया जा रहा है। जीएसटी लागू होने के बाद मनोरंजन कर नहीं लिया जा सकता है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता प्रवीण दुबे ने जवाब पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय दिए जाने का अनुरोध किया।

युगलपीठ ने राज्य सरकार के साथ नगर निगम को भी जवाब पेश करने के लिए समय दे दिया है। नगर निगम की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह और समदर्शी तिवारी ने पक्ष रखा। इस मामले में होर्डिंग संचालकों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में भी विशेष अनुमति याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद स्पष्ट कर दिया है कि आउटडोर मीडिया एडवरटाइजिंग रूल्स 2017 के नियमों के अनुसार ही टेंडर दिए जाए।