मठ मंदिर को ही बिसार दिया प्रशासन ने!

 

 

0 प्रशासन लिखवा रहा जिले का नया इतिहास . . .02

आनन फानन ऑन एयर की गयी सरकारी वेबसाईट चर्चाओं में

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। नेशनल इंफरमेशन सेंटर (एनआईसी) के द्वारा संधारित की जाने वाली सिवनी जिले की वेब साईट चर्चाओं में आ गयी है। वन इंडिया वन नेशन के तहत 22 जुलाई को इसका शुभारंभ समय सीमा की बैठक में किया गया था। आधी अधूरी जानकारी के साथ आरंभ की गयी इस वेब साईट से लोगों को सिवनी के इतिहास की भ्रामक जानकारी मिलने की संभावनाएं बढ़ गयी हैं।

समय सीमा की बैठक में 22 जुलाई को जिला सूचना विज्ञान अधिकारी जी.एस. बघेल द्वारा उपस्थित सभी अधिकारियों को वेब साईट की विस्तृत जानकारी दी गयी, जिसमे बताया गया कि यह वेब साइट द्विभाषी है, जिसे हिंदी एवं अंग्रेजी भाषा में सरकार की वेब साईट हेतु स्थापित गाईड लाईन के अनुसार वन इंडिया वन पोर्टल की थीम पर आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए जिला एनआईसी ने तैयार किया है।

इस वेब साइट में जिले के बारे में, विभाग निर्देशिका, नागरिक सेवाओं एवं जिले के तीज त्यौहार, खानपान, टूरिस्ट स्पॉट, प्रमुख उत्पादों  की जानकारी एक क्लिक में प्राप्त होगी। फोटो गैलरी के अंतर्गत जिले की महत्वपूर्ण दर्शनीय, धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थानों की फोटो जानकारी के साथ उपलब्ध रहेगी। इस वेब साईट का उपयोग दृष्टि बाधित भी कर सकेंगे, वेब साइट पर स्क्रीन रीडर की सहायता से आवाज के माध्यम से पढ़ने में आसानी होगी।

इस वेब साईट में जिले में महज़ 08 दर्शनीय स्थल हैं, ऐतिहासिक महत्व के स्थलों की फेहरिस्त में महज़ 04 एवं पर्यटन स्थलों में 06 स्थानों का ही उल्लेख किया गया है। इसमें दर्शनीय स्थलों में गुरू रत्नेश्वर धाम दिघौरी, शिवधाम मठ घोघरा, पुण्य सलिला बैनगंगा के उद्गम स्थल मुण्डारा, छपारा के पास बंजारी देवी का मंदिर, शीलादेही स्थित वैष्णवी देवी मंदिर, आमागढ़ के पास अम्बा माई का मंदिर, धनौरा के रिछारिया बाबाजी का मंदिर और सिवनी के दिगम्बर जैन मंदिर को शामिल किया गया है।

यहाँ उल्लेखनीय होगा कि सिवनी के दर्शनीय स्थलों में आदि शंकराचार्य के द्वारा स्थापित किये गये मठ मंदिर को ही विलोपित कर दिया गया है। जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के द्वारा शीलादेही में माता वैष्णवी तीर्थ को तो इसमें स्थान दिया गया है, पर आदि शंकराचार्य के द्वारा स्थापित मठ मंदिर को स्थान न दिये जाने की व्यापक प्रतिक्रियाएं हो रही हैं।

जानकार बताते हैं कि मठ मंदिर परिसर में आदि शंकराचार्य के द्वारा जलायी गयी सिद्ध धूनी का वर्णन भी मिलता है। अज्ञात कारणों से यह धूनी वर्तमान में प्रज्ज्वलित नहीं है। मठ मंदिर से लगा हुआ ऐतिहासिक मठ तालाब है, जिसे आदिकाल में वबहुआ फिर मोती तालाब और कालांतर में मठ मंदिर के बाजू में होने से इसे मठ तालाब के नाम से पहचाना जाने लगा।

इसके अलावा मण्डला रोड पर रेल्वे लाईन के पास पत्थर की बारात भी अपने आप में अनोखी ही मानी जा सकती है। इस स्थान पर तब बहुतायत में लोग जाया करते थे जब नैरोगेज़ रेल पथ पर रेल दौड़ा करती थी। सिवनी के दर्शनीय स्थलों में सकाटा के जंगल भी बहुत प्रसिद्ध रहे हैं। कहा जाता है कि ये जंगल इतने घने थे कि कुछ स्थानों पर तो सूर्य की रौशनी भी वहाँ की धरती पर नहीं पड़ पाती थी।

दर्शनीय स्थलों की अगर बात की जाये तो कटंगी रोड पर स्थित चंदन बगीचे को जिले के शान माना जाता था। लगभग पाँच हजार स्क्वयर किलोमीटर में फैला यह जंगल नब्बे के दशक के बाद चंदन तस्करों की भेंट चढ़ गया। माना जाता था कि इस जंगल का चंदन देश भर में सबसे मशहूर था। वैसे तो मैसूर का चंदन ही मशहूर है, पर सिवनी के चंदन की खासियत यह थी कि इसमें कीड़े नहीं लग पाते थे।

(क्रमशः जारी)