चूना भट्टी में बढ़ रहे उल्टी दस्त के मरीज़

 

 

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। शहरी सीमा से लगा चूना भट्टी का क्षेत्र एक बार फिर चर्चाओं में है। पहले यहाँ की बसाहट को लेकर यह चर्चाओं में था तो अब गंदे पानी के प्रयोग के कारण यहाँ उल्टी दस्त के मरीज़ों की बढ़ती तादाद के कारण यह एक बार फिर से चर्चाओं में आ गया है।

बरघाट एवं मण्डला मार्ग के बीच शहरी सीमा से लगभग सटे हुए चूना भट्टी नामक इलाके में बसे ग्राम पंचायत छिड़िया पलारी की नयी बसाहट चूना भट्टी के नाम से पहचानी जाती है। बारिश के दिनों में यहाँ के निवासी अमीबा, ईकोलाई एवं अन्य तरह के प्रोटोजुआ बैक्टीरिया की गिरफ्त में हैं।

बताया जाता है कि ग्राम मे दर्जनों उमर दराज, प्रौढ़, युवा एवं बच्चे उल्टी दस्त की बीमारी से ग्रसित हैं। लोगों ने आशंका व्यक्त की है कि कहीं यह महामारी का रूप धारण न कर ले। उल्लेखनीय होगा कि बारिश के इस दौर में जिले की लगभग समस्त पंचायतों में लोग बारिश जनित दूषित जल से उल्टी दस्त, डायरिया, मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियों की जद में हैं।

आये दिन मीडिया में इस आशय की खबरों के प्रकाशन के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के द्वारा सक्रियता न बरती जाना आश्चर्य का ही विषय माना जायेगा। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा हर माह करोड़ों रुपये अपने कर्मचारियों – अधिकारियों की पगार और दवाओं में खर्च किये जाते हैं। इसके बाद भी इस तरह की बीमारियों का पनपना आश्चर्य को ही जन्म देता है।

वहीं, लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी विभाग के द्वारा हर साल निःशुल्क बांटी जाने वाली जर्मेक्स नामक दवा को भी प्रभावित क्षेत्रों में नहीं बांटा जा रहा है। और तो और मलेरिया विभाग भी मच्छरों के प्रजनन के इस मौसम में मच्छरों के शमन के लिये किसी तरह के ठोस प्रयास करता नहीं दिख रहा है।

जानकारों का कहना है कि आज आवश्यकता इस बात की है कि स्वास्थ्य विभाग के द्वारा आपदा पूर्व प्रबंधन (डिजास्टर मैनेजमेंट) के तहत विकास खण्डवार एक विशेष रेस्क्यू दल का गठन कर, उसे सारे संसाधनों से सुसज्जित कर एक फोन नंबर भी उसे दे दिया जाये ताकि इस तरह की स्थिति में तत्काल ही उसे सूचित किया जा सके।