महिलाओं के लिये शॉपिंग मॉल

 

 

(शरद खरे)

तीन साल पहले जब विपक्ष में बैठी काँग्रेस को जिले की महिलाओं की सुध आयी थी तब इसे बेहतर संकेत माना गया था। महिला काँग्रेस और युवा काँग्रेस के द्वारा संयुक्त रूप से जिला कलेक्टर को इस आशय का ज्ञापन सौंपा गया था। यह बात किसी से छुपी नहीं है कि जिले में महिलाओं के उत्थान अथवा महिलाओं के हितों को साधने के नाम पर अनेक संगठन सक्रिय तो हैं किन्तु इनके द्वारा स्थानीय स्तर पर महिलाओं की सुध नहीं ली जाती रही है।

इक्कीसवीं सदी में नगर पालिका परिषद में अध्यक्ष पद पर अब तक दो महिलाएं काबिज रहीं हैं। इसके अलावा अनेक पार्षद महिला हैं। सिवनी की संसद सदस्य और विधायक भी महिला रहीं हैं। वर्तमान जिला पंचायत और जनपद पंचायत अध्यक्ष भी महिला ही हैं। सिवनी में अनेक विभागों की कमान भी महिला अधिकारियों के हाथ में है।

सिवनी शहर वाकई में अपने आप में एक अनोखा शहर होगा। सिवनी शहर में महिलाओं के प्रसाधन के लिये सार्वजनिक स्थलों पर एक भी स्थान नहीं है। शहर के मुख्य बाज़ार बुधवारी, शुक्रवारी, सोमवारी (भैरोगंज), बारापत्थर आदि में कहीं भी महिलाओं के प्रसाधन के लिये स्थान न होना अपने आप में अजीब बात ही मानी जा सकती है।

मजे की बात तो यह है कि नगर पालिका पर काँग्रेस और भाजपा दोनों ही काबिज रही हैं। किसी भी दल के द्वारा महिलाओं के लिये इस मामले में विचार नहीं किया गया। सिवनी के सांसद-विधायकों ने भी इस दिशा में सोचने की जहमत नहीं उठायी है। यह भी अपने आप में आश्चर्य से कम नहीं है।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की बातें आज़ादी के बाद सत्तर सालों से लगातार की जा रही हैं, पर हालात देखकर यही कहा जा सकता है कि इस तरह की बातें महज़ कागजों तक ही सीमित रह जाती हैं। जिले में भी महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिये विशेष प्रयास नहीं किये जाते रहे हैं।

कुछ स्वयं सेवी संस्थाओं के द्वारा महिलाओं को अत्मनिर्भर बनाने के लिये सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण आरंभ किये गये, किन्तु ये भी इतिहास की बातें हो गयी हैं। अब काँग्रेस प्रदेश में सत्ता में है। काँग्रेस के नेताओं को अगर अपनी तीन साल पुरानी माँग याद हो और उनके प्रयासों से ही सही महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिये अगर उनका कोई शॉपिंग माल बनवा दिया जाये तो यह एक नज़ीर बन सकती है जिसका अनुशरण देश-प्रदेश के अन्य जिले भी कर सकते हैं।

आश्चर्य तो इस बात पर होता है कि तीन सालों में जिला प्रशासन के द्वारा भी इस महत्वपूर्ण माँग पर ध्यान नहीं दिया गया है। वरना अब तक कम से कम महिलाओं के लिये शॉपिंग मॉल के लिये जमीन तो देख ही ली जाती। वैसे महिलाओं के शॉपिंग मॉल के लिये दलसागर तालाब के सामने बने एफसीआई के गोदाम (जहाँ पूर्व में पालिका कचरा फेंकती रही है), एस्ट्रोटर्फ के सामने के रिक्त भूखण्ड, जनपद पंचायत के बाजू के रिक्त भूखण्ड सहित अनेक स्थल हैं जिनका चयन किया जाकर यहाँ इसका निर्माण कराया जा सकता है। इसके लिये सांसद-विधायकों सहित सियासी दलों के नुमाईंदों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करने की जरूरत है।

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