जिले की बावड़ियों को भी नहीं मिल पाया स्थान!

 

 

 

0 प्रशासन लिखवा रहा जिले का नया इतिहास . . . 09

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। जिले की सरकारी वेब साईट पर जिले की ऐतिहासिक, सामरिक, धार्मिक महत्व आदि की बातों को स्थान न मिल पाना आश्चर्य जनक ही माना जायेगा। लगभग एक माह पूर्व उदघाटित इस वेब साईट में जिले के अनेक स्थानों को स्थान न मिल पाना अपने आप में किसी अजूबे से कम नहीं है।

जिला प्रशासन के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि वन इंडिया वन पोर्टल की तर्ज पर बनायी गयी जिले की इस सरकारी वेब साईट को आनन – फानन 22 जुलाई को ऑन एयर कर दिया गया था। इसके लोकार्पण के लिये प्रदेश के किसी मंत्री आदि को भी आमंत्रित नहीं किया गया था। एक तरह से यह सरकारी वेब साईट गजेटियर भी मानी जा सकती है।

सूत्रों का कहना है कि जब भी कोई सैलानी अपने भ्रमण का कार्यक्रम तय करता है तो उसके द्वारा सबसे पहले उस स्थान अथवा जिले के बारे में पूरी – पूरी जानकारी हासिल की जाती है। अगर कोई सैलानी इस वेब साईट को देखेगा तो उसे सिवनी के बारे में विस्तार से जानकारी शायद ही मिल पाये।

यहाँ यह उल्लेखनीय होगा कि देश में इस समय पर्यटन एक बहुत बड़े उद्योग के रूप में उभरकर सामने आया है। आज प्रदेश के अनेक जिले अपने अंदर समेटे अनेक स्थलों की ब्रांडिंग जमकर कर रहे हैं ताकि पर्यटकों को लुभाया जा सके। सिवनी में अगर पर्यटकों की संख्या पेंच नेशनल पार्क के अलावा अन्य स्थानों पर बढ़ती है तो निश्चित तौर पर यह सिवनी के लोगों के लिये रोजगार के साधन बढ़ाने में मील का पत्थर ही साबित होगा।

सिवनी में अनेक बावड़ियां हैं जो सत्तर के दशक तक सुर्खियों में रहीं हैं। यह बात अलहदा है कि प्रशासनिक उपेक्षा का दंश इन बावड़ियों को जर्जर हाल में पहुँचा चुका है। जिला मुख्यालय की ही अगर बात की जाये तो जिला मुख्यालय में दीवान महल की बावड़ी बहुत ही मशहूर रही है।

जिले की बावड़ियां स्थापत्य कला का नायाब नमूना भी मानी जा सकती हैं। इसके अलावा जिला मुख्यालय से महज चंद किलोमीटर दूर चोर बावड़ी का अस्तित्व भी समाप्त होने के कगार पर ही है। यह चोर बावड़ी लगभग डेढ़ सौ साल से ज्यादा पुरानी मानी जा सकती है।

इसके अलावा लखनादौन की बावड़ी भी कुछ दशकों पहले तक मशहूर रही है। नरसिंहपुर रोड पर हनुमान मंदिर के पास की बावड़ी भी जर्जर अवस्था को प्राप्त कर रही थी। लगभग दो साल पहले जब लखनादौन में पानी की त्राहि त्राहि मची तब इस बावड़ी को साफ करवाया गया था।

वहीं जानकारों की मानें तो इन बावडियों की एक और खासियत यह थी कि इनमें विभिन्न सुरंगे बनी हुईं थीं जो विभिन्न राज्यों को आपस में जोड़ती थीं। किसी आपदा, आक्रमण आदि के हालात में इन बावड़ियों से भूमिगत सुरंगों के चलते काफी दूर जाया जाकर अपने आप को सुरक्षित रखा जा सकता था।