‘सिटी ऑफ जॉय’ मांडू अब विश्व धरोहर की राह पर

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। सिटी ऑफ जॉय” के नाम से प्रसिद्ध ऐतिहासिक पर्यटन स्थल मांडू को अब विश्व धरोहर बनाने के लिए सरकार ने भी जतन शुरू कर दिए हैं। दो दशक से मांडू का नाम यूनेस्को तक भेजा जा रहा है, लेकिन कोई न कोई दस्तावेजी कमी उसे विश्व विरासत का दर्जा दिलाने से रोक देती है। मध्यप्रदेश सरकार ने अब मांडू का डोजियर तैयार कर केंद्र सरकार की मदद से यूनेस्को को प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर ली है।

विंध्याचल की पहाड़ियों में बसे करीब 1400 साल पुरातात्विक इतिहास समेटे इस धरोहर की खूबसूरती का जिक्र विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक दस्तावेज जहांगीरनामा और अकबरनामा” में भी दर्ज है। मांडू में एक साथ कई खूबियां मौजूद हैं, विश्व विरासत के लिए मूर्त और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत” के रूप में दावा किया गया है।

सरकार का दावा है कि यूनेस्को द्वारा निर्धारित 10 में से तीन मानदंडों पर मांडू पूरी तरह खरा उतरता है, जबकि विश्व धरोहर के लिए एक कैटेगरी पूरी करना ही पर्याप्त माना जाता है। मप्र में अभी सांची के स्तूप, खजुराहो के मंदिर और भीमबैठिका को विश्व विरासत का दर्जा प्राप्त है।

तैयार कराया डोजियर

मप्र के इस पुरातात्विक नायाब नगीने को विश्व विरासत का दर्जा दिलवाने पर्यटन विकास मंत्री सुरेंद्र सिंह हनी बघेल ने वास्तुविद गरिमा राजपूत से मांडू पर केंद्रित दो हजार पेज का डोजियर तैयार करवाया है। गरिमा बताती हैं कि इसमें 13 नक्शों की सहायता से मांडू के 63 प्रमुख और 100 से अधिक सभी स्मारकों का ब्योरा दिया गया है।

इमारतों के 200 चित्रों के अलावा बफर जोन का सैटेलाइट चित्र और वर्तमान स्वामित्व आदि का जिक्र भी है। डोजियर निर्माण में धार कलेक्टर, पर्यटन विकास निगम, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और वन विभाग से लेकर स्थानीय नगर परिषद की मदद भी ली गई है।

धरती पर सबसे खूबसूरत स्थल

बताया जाता है कि जहांगीरनामा में मांडू का वर्णन श्रावण माह में धरती का सबसे खूबसूरत स्थल” के रूप में किया गया है। मानव जीवन, कला-संस्कृति, वास्तुशिल्प, मौसम विज्ञान, पदार्थ विज्ञान, निर्माण प्रौद्योगिकी से लेकर जल अभियांत्रिकी की समृद्ध पुरातन विरासत भी यहां सहेजी गई है।

कमलनाथ सरकार ने हाल ही में मांडू पर तैयार कराए डोजियर में इसका ब्योरा देते हुए मांडू के 1400 साल के सांस्कृतिक इतिहास की कहानी भी बताई है। मांडू में एक साथ इतनी खूबियां दुर्लभ हैं। इस लंबे कालखंड में मांडू ने कई सल्तनतें और उतार-चढ़ाव भी देखे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *