करगिल और देश की सीमा पर शहीद जवानों की रूह

(विवेक ओझा)
तुम्हारा नाम क्या है- अदम्य शौर्य उर्फ विजय!
तुम्हारा काम क्या है- हिफाजत और महफूज रखना!!
कैसे कर लेते हो- ये धरती मेरी मां है!!!
गीत सुनते हो आप लोग- विविध भारती सुनने के बाद हड्डियों और पसलियों की चटख आवाजों के बीच मन बहल जाता है।
कैसी मुश्किलें देखी हैं- कई बार जान निकालने और निकलने के लिए बम के फटने का इंतजार करना पड़ा है। वह सब भी खाना पड़ा है जो सपनों में भी ना सोचा था। गोलियां, बारूद खत्म होने पर कई बार सच में सनी देओल और अजय देवगन बनना पड़ा है। बेटे-बेटियों के मुकद्दस जन्मदिनों के अवसर पर भारत मां की हिफाजत करते हुए मां को बोला है कि चाहे मेरी जान ले ले, उन्हें सलामत रखना। हम दिल पर पत्थर रखकर मेकअप नहीं करते, पत्थरों के सीनों को चीरकर आगे बढ़ते है ताकि जावेद साहब को कुछ अच्छा लिखने को मिल सके।
बड़ी भावनात्मक और साहित्यिक बातें कर रहे हैं आप लोग- दिल हमारे पास भी है भाईसाहब लेकिन जब फौज में भर्ती होने की तैयारी कर रहे थे, तभी ठान लिया था कि इसे किसी सही काम के लिए धड़कने देंगे। हमें तो हर समय लगता है कि भारत-पाकिस्तान का मैच चल रहा है यहां। अगर हम इस मैच में जीतते हैं तो पूरा भारत पटाखे फोड़ेगा। कभी-कभी तो मन करता है कि फॉग के डिब्बे़ में कुछ विस्फोटक रखकर हम भी इधर सीमा पर कुछ खुशबू महका ही दें। मोदी और धोनी आए थे, अच्छा लगा था हमको। कश्मीर जन्नत है और इसका एहसास सुखविंदर पाजी के गाने से हमें हो गया था। ऊपर अल्लाह, नीचे धरती, बीच में तेरा जुनून। करगिल में आज के दिन ऊपर बैठकर गोलियां दागने वाला अपने को अल्लाह मियां की गाय मानने वाला पाकिस्तान ही तो था और हम धरती मां वाले सुनील शेट्टी और बीच में हमारा जुनून और गरूर जम्मू कश्मीर था।
करगिल में जीत का श्रेय किसे देना चाहेंगे आप सब- अखंड भारत, उसकी जनता और सेना के विश्वास को। चूंकि देश ने हम शहीदों को विजयीभव कहा था और इसलिए अंतरराष्ट्री य सीमाओं से हमारे बलिदान की संदली खुशबू आज भी बरकरार है।
क्या हुआ था उस रोज- हम लोगों ने 1999 में मई-जुलाई के बीच पाकिस्तान से कश्मीर के करगिल में यह युद्ध लड़ा था। 26 जुलाई 1999 को हम सबने करगिल युद्ध में विजय हासिल कर ली। करगिल में करीब 18 हजार फीट की ऊंचाई पर हम जवानों ने यह लड़ाई लड़ी। इस जंग में हम 527 से ज्यादा लोग थे जिन्होंने अपनी जान गंवाई। वहीं, हमारे 1300 से ज्यादा जवान घायल हुए थे। करगिल युद्ध तकरीबन 100 किलोमीटर के दायरे में लड़ा गया था जहां पर करीब 1700 पाकिस्तानी सैनिक भारतीय सीमा के तकरीबन 8-9 किलोमीटर अंदर तक घुस आए थे। पाकिस्तान के तीन हजार से ज्यातदा सैनिक हमने मारे थे।
आप लोगों को यह करगिल वारदात की सूचना कैसे मिली थी- यह बात 1999 की है। एक दिन ताशी नामग्याल (एक किसान या जुलाहा) करगिल के बाल्टिक सेक्टर में अपने नए याक की तलाश कर रहा था जो कहीं पर खो गया था। वह पहाड़ियों पर चढ़कर देख रहा था कि आखिर उसका याक कहां गायब हो गया? ढूंढते-ढूंढते उसका याक नजर आ गया लेकिन उसके साथ-साथ उसने जो चीज देखी, उसे ही करगिल युद्ध की पहली घटना माना जाता है। यहां पर उसने कुछ संदिग्ध लोगों को देखा और भारतीय सेना को तत्काल इसके बारे में जानकारी दी।
क्या लगता है आप लोगों को, क्या वजह रही होगी पाकिस्तान के ऐसा दुस्साहस करने की- हम लोग तो सैनिक हैं, हमें सेना कमांड देती है कि क्या ऐक्शन लेना है। यह तो अंतरराष्ट्री य विश्लेषक लोग जानें लेकिन कुछ समाचार पत्रों के जरिए हमें यह पता लगा कि भारत ने 1998 में अपना दूसरा नाभिकीय परीक्षण कर और अपनी पहली न्यूक्लियर डॉक्ट्राइन बनाने का जो काम किया, उससे पाकिस्तान डर गया और उसने भारत पर दबाव बनाने का मन बनाया।
अटलजी की क्या सोच थी उस समय- अटलजी तो भारत की संप्रभुता को और मजबूती देने के काम में लगे थे। करगिल घटना के बाद तो वाजपेयीजी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से फोन पर कहा कि आपने हमारे साथ बहुत ही बुरा सलूक किया है। एक तरफ तो आप लाहौर में हमसे गले मिल रहे हैं, दूसरी तरफ आपके सैनिक करगिल की पहाड़ियों पर कब्जा जमा रहे थे। शरीफ क्या कहते, उन्होंनने कहां कि मुझे तो इसकी जानकारी भी नहीं थी। यह तो जनरल परवेज मुशर्रफ का ब्रेन चाइल्ड था और इस तरह शरीफ ने अपनी शराफत की सारी हदें पार कर दीं।
रेलवे ने आप लोगों के बलिदान के सम्मान में कुछ फैसला लिया है, पता है आपको- हां सुना है हमने कि भारतीय रेलवे ने करगिल विजय दिवस के मौके पर अपनी ट्रेनों के 700 से ज्यांदा कोचों पर हम शहीदों को याद करते हुए विनाइल पोस्टर लगाने का निर्णय किया है।
आप इतनी देर से सवाल पूछे जा रहे हैं, आज के दिन हम शहीदों पर आपके क्या जज्बायत हैं- आप जैसे जांबाज जवानों के लिए क्या कहूं, आप हर इंसानी अच्छाई से ऊपर हैं। बस हरिवंश राय बच्चन की कुछ पंक्तियां आज सुबह से ही मन में गूंज रही हैं आप लोगों के लिए। इजाजत हो तो बोलूं।
हां-हां, बिल्कुल बताइए। हम लोग भी तो जानें कि भारतीय युवा हम लोगों के लिए क्या ख्याकल रखते हैं।
अच्छा कहता हूं-
स्वप्न आता स्वर्ग का दृग कोरकों में दीप्ति आती,
पंख लग जाते पगों को ललकती उन्मुक्त छाती!
रास्ते का एक कांटा पांव का दिल चीर देता,
रक्त की दो बूंद बहती एक दुनिया डूब जाती!!
आंख में हो स्वर्ग लेकिन पांव धरती पर टिके हों,
कंटकों की इन अनोखी लकीर का सम्मान कर लें!!
आप यह बताइए कि हम लोगों के बारे में देश क्या सोचता है- देखिए मेरी तरह पूरा भारत इस बात से सहमत है कि अंतरराष्ट्री य राजनीति, अंतरराष्ट्री य संबंध और विदेश नीति का मूल लक्ष्य राष्ट्रहित है। राष्ट्रहित देश का सबसे बड़ा लक्ष्य है, इस पर आंच आए तो नियमों, कानूनों, नैतिकता सबको ताक पर रखा जा सकता है और सबसे बड़ा राष्ट्रहित है देश की प्रादेशिक अखंडता यानी टेरिटोरियल इंटिग्रिटी और संप्रभुता यानी सॉवरेनटी की सुरक्षा करना। लेह, लद्दाख बचाना हो, पीओके में कश्मीर बचाना हो, द्रास, पुंछ, राजौरी, टाइगर हिल्स, सियाचिन, डोकचेम, सरक्रीक, कच्छ की खाड़ी बचानी हो तो ये सब काम आप जांबाज जवानों के बिना नहीं हो सकता। हमारे सुप्रीम नैशनल इंट्रेस्टै के प्रॉटेक्टर हैं आप लोग। इन सबको प्रॉटेक्ट करने के लिए भारत ने आप सब जवानों को विजयी भव कहा था। अखंड भारत को महफूज रखा है आप लोगों ने हर बला से।
आप लोगों की कोई ख्वाहिश आज के दिन- देश के लिए शहादत हमारे लिए भारत रत्न और नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने से कम नहीं है। हम बस यह कहना चाहते हैं कि केवल वर्दी पहन लेने और हाथ में बंदूक उठा लेने का नाम ही वतन का सिपाही नहीं है। भारत ऐसा मुल्क है जहां के बच्चे-बच्चे में एक सैनिक बसता है। जब उरी जैसी फिल्मों में विकी कौशल जैसे अभिनेता पाकिस्तानियों को मार रहे होते हैं तो युवाओं के मन में राष्ट्रवाद हिलोरें मार रहा होता है। क्रिश जब अन्याय के लिए लड़ता है तो भारत का बच्चा-बच्चा उसे अपना नैतिक समर्थन दे रहा होता है। हम चाहते हैं कि देश और सरकार हमारे इरादों को और मजबूत करें, हमें प्राणवान हौसला दें। हमसे कम से कम यह न पूछें कि आतंकी मारे या पेड़ मारे।
देश के शहीदों, आपकी रूह से यह साक्षात्कार कर मन बहुत खुश हुआ है। करगिल के अमर शहीदों, आपको समूचे भारत की तरफ से भारत की बगिया में करगिली फूल की खुशबू फैलाने के लिए स्मृति दिवस मुबारक हो।
(साई फीचर्स)