जैविक खेती तो कर रहे हैं पर नहीं मिल रहा उचित दाम

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

इंदौर (साई)। जैविक खेती तो हम कर रहे हैं, लेकिन जब जैविक उत्पाद लेकर बाजार में बेचने जाते हैं तो वहां मुश्किल आती है। न तो उचित दाम मिलते हैं और न मार्केटिंग की कोई व्यवस्था है। जैविक खेती करने वाले किसानों के सहयोग के लिए सरकार को आगे आना होगा। सरकार द्वारा ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करना होगा जिससे किसान अपने जैविक उत्पाद आसानी से और उचित दाम पर बेच सकें।

ये बात प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए किसानों ने खंडवा रोड स्थित कृषि विभाग के कृषि विस्तार और प्रशिक्षण केंद्र में कही। यहां मध्यांचल फोरम की अगुआई में जैविक खेती पर कार्यशाला रखी गई थी। फोरम द्वारा जैविक खेती करने वाले प्रदेश के विभिन्न गांवों के किसानों को एकजुट किया गया था। कार्यशाला में जैविक खेती के जानकार रवि केलकर ने बताया कि जब तक किसान बाजार को नहीं समझेंगे तब तक उन्हें जैविक उत्पादों की सही कीमत नहीं मिलेगी। किसान को स्वयं बाजार जाना होगा। किसान कच्चा माल लेकर बाजार जाएंगे तो ऊंची कीमत नहीं मिलेगी। उपज का वैल्यू एडीशन करना होगा।

खुद का बीज, खुद की खाद, खुद का बाजार तैयार करें किसान

अजीत केलकर ने कहा कि किसानों को दो बातों पर ध्यान देना होगा। एक तो खेती की लागत कम करनी होगी और बाजार की चुनौतियों से निपटने का रास्ता निकालना होगा। इसके लिए किसान को स्वयं का बीज, स्वयं की खाद, स्वयं का कीटनाशक और स्वयं का बाजार तैयार करना होगा। आज खेती में लागत अधिक और शुद्ध आमदनी बहुत कम हो गई है। किसान के सामने मौसम परिवर्तन, जमीन की घटती उर्वरता, कीटों के प्रकोप और परिवार के पोषण की चिंता है।

कंपनी और समूह बनाकर देना होगा बढ़ावा

सिमरोल के सरपंच दिनेश सलवाड़िया ने दिलचस्प अंदाज में बताया कि जैविक खेती करने वाले किसानों का संघर्ष स्वयं के घर से ही शुरू होता है। हमारे कुछ किसान भाइयों ने जैविक खेती की शुरुआत की तो परिवार के अन्य लोगों ने कहा कि इससे उत्पादन घट जाएगा। तब किसी तरह एक एकड़ जमीन जैविक खेती के लिए लेने को तैयार किया। सरकार को जैविक खेती के लिए किसानों की मदद करनी होगी। जिला स्तर पर जैविक उत्पादों की प्रयोगशाला स्थापित करनी चाहिए ताकि किसान वहां अपने उत्पादों की जांच करवा सके। किसानों की कंपनी और समूह बनाकर जैविक खेती को बढ़ावा देना होगा।

महिलाओं की भागीदारी को दिलानी होगी पहचान

कासा संस्था के तपनजी ने कहा कि खेती के कामकाज में महिलाओं की बहुत भागीदारी है, लेकिन उन्हें कोई पहचान नहीं मिलती। हमें महिलाओं की भागीदारी को पहचान और सम्मान देना होगा। मार्केटिंग के जानकार जेसन थॉमस ने किसानों को मार्केटिंग के गुर बताए। कार्यशाला को मध्यांचल फोरम की अध्यक्ष इंदिरा नायडू ने भी संबोधित किया। कार्यशाला के सूत्रधार और फोरम के सचिव एमएल यादव ने जैविक खेती में किसानों को आने वाली समस्याएं और चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया। सिमरोल के जैविक कृषि किसान जितेंद्र पाटीदार, जगदीश उजीवाल, झाबुआ के पदमसिंह, गंजबासौदा के वीरसिंह लोधी, प्रभुदयालसिंह निनामा, निवाली के ज्ञानसिंह तरोले आदि ने अपने अनुभव बताए।

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