बारिश में इन बीमारियों से रहें सतर्क, सावधानी में ही सुरक्षा है

 

 

(हेल्थ ब्यूरो)

सिवनी (साई)। बरसात के मौसम में गर्मी से राहत तो मिलती है, लेकिन उमस, चिपचिपाहट उतना ही परेशान भी कर देती है। इन दिनों बाहरी खाने से परहेज करना चाहिये और साफ – सफाई का भी खास ध्यान रखना चाहिये।

इन दिनों आई फ्लू, गलसुआ और फूड पॉईजनिंग तेजी से फैलते हैं साथ ही जरा सी चूक होते ही ये बीमारियां आपको दबोच लेती हैं। चिकित्सकों के अनुसार ऐसे में यदि आप इनसे अपने व अपनों को बचाना चाहते हैं, तो कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है।

आई फ्लू : इसे कंजक्टिवाईटिस कहा जाता है। इससे आँखों में लालगी और जलन होने लगती है। आई फ्लू की शुरूआत खारिश से होती हैं और आँखों से चिपचिपा द्रव्य निकलने लगता है। इससे पलकें आपस में जुड़ने लगती हैं, जिसे एलर्जिक संक्रमण माना जाता है। आँखों से पानी निकलने से तेज दर्द होता है। एक बात और यह रोग छूने से फैलने वाला है। यह रोग एक रोगी से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। बच्चों में यह संक्रमण तेजी से फैलता है। वैसे यह इंफेक्शन 04 से 05 दिन में ठीक हो जाता है लेकिन इसके बावजूद डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

ये हैं लक्षण : नींद से उठने पर दोनों पलकों का आपस में चिपक जाना, सिर दर्द होना, आँखों में बार-बार पानी और गीद आना, पलकों पर अधिक सूजन होना, आँखों में लाली, खुजली होना, रोशनी सहन न कर पाना।

ऐसे करें बचाव : यदि घर में कोई आई फ्लू का शिकार हो गया है तो परिवार के सभी सदस्य साफ सफाई पर खास ध्यान रखें। धूप के चश्मे का इस्तेमाल करें। तेज रोशनी से बचकर रहें। टीवी न देखें, नजर लगाकर किताबें न पढ़ें। थोड़ी – थोड़ी देर बाद शीतल जल से आँखों पर छींटे मारें। आँखों को मसले नहीं, इससे लालगी व सूजन और बढ़ जायेगी। तौलिया, साबुन व आई ड्रॉप अलग रखें।

स्वीमिंग पूल का इस्तेमाल न करें। तकिये का कवर रोजाना बदलें। कॉन्टेक्ट लैंस वाले आँखों को रगड़े नहीं। आँखों को धुंआ, धूल, तीखी धूप और तेज हवा से बचायें। डॉक्टरी सलाह से एंटीबायोटिक ड्रॉप्स र्या आॅइंटमेंट का इस्तेमाल करें।

ये हैं घरेलू इलाज : सूखे नारियल की गिरी और मिश्री खाने से आई फ्लू तेजी से ठीक होता है। नारियल पानी और नींबू पानी का सेवन भी अच्छा रहता है। सेब, केला, गन्ना व मूली भी फायदेमंद होती है। फल को चाकू से काटने की बजाय चबा-चबा कर अच्छे से खायें। बादाम को रात भर भिगोकर रखें। सुबह पीसकर पानी मिलाकर पी लें। साथ ही दूध पी लें।

गलसुआ : गलसुआ, गले में होने वाला एक तरह का संक्रमण है जो लार ग्रंथी में होता है। इसमें दर्द के साथ गले के कान के पास वाले हिस्से में सूजन होती है, जिससे खाने – पीने और निगलने में भी काफी तकलीफ होती है और कई बार दर्द के कारण सिर्फ तरल पदार्थों पर ही निर्भर रहना होता है। ये हैं इसके घरेलू उपाय:

  1. गलसुआ होने पर गरम पानी और नमक की सिकाई करना फायदेमंद होता है। इसके अलावा गरम पानी में नमक डालकर गरारे करने से भी लाभ होता है।
  2. नमक को एक कपड़े में बाँधकर इसे गरम तवे पर हल्का सेंक कर गले की सिकाई करें, इससे सूजन उतरेगी और दर्द भी कम होगा।
  3. पके हुए चांवल के गुनगुने माण्ड में एक चुटकी नमक डालकर इसका सेवन करना फायदेमंद होता है। इससे शरीर को पोषण भी मिलेगा, पेट भी भरेगा और गलसुआ में भी लाभ होगा।
  4. ताजे अदरक को टुकड़ों में काट लें और इन टुकड़ों को सुखा लें। अब इसे काले नमक में लपेटकर चूसें। इसके अलावा कच्चे अदरक को भी काले नमक के साथ चूसने पर लाभ होता है, पर सूखा अधिक फायदेमंद है।
  5. मैथी के दानों को पीसकर पाउडर बना लें और इसका लेप बनाकर गलसुए वाले स्थान पर लगायें। इसमें एक चुटकी नमक डालकर इसे बेहद हल्का गुनगुना करके लगाने से ज्यादा फायदा होगा।

फूड पॉईजनिंग : सुहावनी फुहारों का दौर आरंभ हो गया है, लेकिन गर्मी के तेवर भी अभी कम नहीं हुए हैं। गर्मी व बारिश का यह मिला-जुला मौसम सेहत के लिहाज से बहुत ही संवेदनशील मौसम है। बार-बार प्यास लगने पर व्यक्ति जहाँ कुछ भी ठण्डा पी लेता है, वहीं इस मौसम में खाद्य पदार्थों को भी खराब होते समय नहीं लगता। फूड पॉईजनिंग का खतरा हमेशा बना रहता है।

ऐसे में अपनी सेहत के प्रति पूरी सावधानी रखनी चाहिये। फूड पॉईजनिंग का सबसे बड़ा लक्षण यह है कि अगर खाना खाने के एक घण्टे से 06 घण्टे के बीच उल्टियां आरंभ हो जाती हैं, तो मान लेना चाहिये कि व्यक्ति को फूड पॉईजनिंग की शिकायत है। इसे तुरंत काबू में करने के लिये डॉक्टर से सलाह लेना चाहिये।

यह मुख्यतः बैक्टीरिया युक्त भोजन करने से होता है। इससे बचाव के लिये कोशिश यही होनी चाहिये कि घर में साफ – सफाई से बना हुआ ताजा भोजन ही किया जाये। अगर बाहर का खाना खा रहे हैं तो ध्यान रखें कि खुले में रखे हुए खाद्य पदार्थों तथा एकदम ठण्डे और असुरक्षित भोजन का सेवन न करें।

इन दिनों ब्रेड, पाव आदि में जल्दी फंफूद लग जाती है इसलिये इन्हें खरीदते समय या खाते समय इनकी निर्माण तिथि को जरूर देख लें। घर के किचन में भी साफ – सफाई रखें। गंदे बर्तनों का उपयोग न करें। कम एसिड वाला भोजन करें।

ऐसे होता है खतरा : गंदे बर्तनों में खाना खाने से। बासी और फफूंदयुक्त खाना खाने से इसका खतरा होता है। अधपका भोजन खाने, माँसाहार, फ्रिज में काफी समय तक रखे गये खाद्य पदार्थों के उपयोग से भी इसके संक्रमण का खतरा बना रहता है।

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