पावर कट को लेकर उर्जा मंत्री कर रहे थे बड़े-बड़े दावे फिर . . .

 

 

 

 

 

बीच में ही चली गई बिजली तो यूं लगे मुस्कुराने

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। मध्यप्रदेश की सरकार बिजली कटौती लेकर विरोधियों के निशाने पर है। लोकसभा चुनाव के दौरान यह प्रमुख मुद्दा बना था। उस दौरान भी कई मंत्रियों के कार्यक्रम में बत्ती गुल हो गई थी। अब मध्यप्रदेश के उर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह की प्रेस कॉफ्रेंस में ही बिजली गुल हो गई। प्रियव्रत सिंह के कंधों पर प्रदेश में बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ करने की जिम्मेवारी है। पत्रकारों से भरे हॉल में जब बत्ती गुल हुई तो मंत्री यूं मुस्कुराने लगे।

उर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह की प्रेस कान्फ्रेंस में एक बार फिर बिजली चली गई। प्रियव्रत कांग्रेस मुख्यालय में बिजली की बेहतरी के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मीडिया को दे रहे थे। प्रियव्रत ने दावा किया कि बिजली व्यवस्थाओं में बहुत सुधार हुआ है और अब ट्रिपिंग की समस्या नहीं आती। इस प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान ही बिजली चली गई। दो मिनट बाद जब बिजली आई तो प्रियव्रत ने कहा कि बिजली जाती है तो आती भी है, उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि ये किसी की साजिश भी हो सकती है।

उन्होंने कहा कि इंदिरा गृह ज्योति योजना के तहत किसानों को सबसे सस्ती बिजली मध्यप्रदेश में ही दी जा रही है। जब कांग्रेस की सरकार बनी थी तो बिजली कंपनियां 47 हजार 400 करोड़ रुपए के घाटे में थीं। हम हालातों को ठीक कर रहे हैं। सारणी और वीरसिंगपुर में एक-एक नई यूनिट खोलने का काम किया जा रहा है। 90 फीसदी उपभोक्ता इंदिरा गृह ज्योति योजना के तहत कवर हो रहे हैं।

उर्जा मंत्री ने कहा कि 6.7 लाख आदिवासी परिवारों को चतुरमसी बिल देंगे, 25 रुपये माह का बिल वे हर चार माह में भर सकेंगे। उन्होंने कहा कि शिवराज सरकार की योजना का आर्थिक प्रावधान कांग्रेस सरकार कर रही है क्योंकि ये उपभोक्ताओं से जुड़ा हुआ मामला है। प्रियव्रत ने कहा कि जो लोग समय पर बिल भरते हैं, उसके फायदे के लिए भी योजना लाई जाएगी। बिजली बिल की वसूली के लिए डबल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जाएगा। जिले और राजधानी में उसकी निगरानी होगी। बढ़े हुए बिल के निराकरण के लिए भी समिति बनाई जा रही है।

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