फिर तांड़व करने लगे भारी वाहन!

 

 

झाबुआ पावर को नहीं दिख रही प्रशासन की चिंता!

(ब्यूरो कार्यालय)

घंसौर (साई)। देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड प्रबंधन को जिला प्रशासन के आदेशों की कतई परवाह नहीं दिख रही है। चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात की तर्ज पर झाबुआ प्रबंधन के द्वारा रात के समय भारी वाहनों से जमकर परिवहन कराया जा रहा है।

ज्ञातव्य है कि घंसौर से गोरखपुर मार्ग के खस्ताहाल होने के कारण भारी वाहन यहां फस रहे हैं। भारी वाहनों के ग्रामीण सड़कों में दौड़ने से क्षेत्रवासियों को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। वहीं सड़कें भी बर्बाद हो रही हैं। इसे देखते हुए प्रशासन के निर्देश पर पुलिस व राजस्व अमले ने भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी थी।

बताया जाता है कि एक दो दिन प्रशासनिक और पुलिस की सख्ती के बाद कथित तौर पर की जाने वाली अनदेखी के चलते रात के स्याह अंधेरे में कोयले से भरे ट्रकों और फ्लाय एश ले जाने वाले कैप्सूल ट्रक्स की रेलमपेल एक बार फिर आरंभ हो गई है। बीति रात भी लगभग दो दर्जन से ज्यादा भारी वाहन रात भर सड़कों का सीना रौंदते दिखे।

ज्ञातव्य है कि रविवार और सोमवार को पुलिस के द्वारा यहां से गुजर रहे 54 वाहनों से 55 हजार 500 रुपए समन शुल्क वसूला था। इसके बाद डंपर और ट्रक चालाकों के द्वारा अपने अपने वाहनों के पहिए थाम दिए गए थे। मंगलवार की रात से प्रशासन की कथित ढिलाई के बाद एक बार फिर घंसौर क्षेत्र में भारी वाहनों की रेलमपेल आरंभ हो गई है।

झाबुआ पावर लिमिटेड प्रबंधन के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा की गई कार्यवाही को प्रबंधन रूटीन की कार्यवाही के रूप में देख रहा है। प्रबंधन का मानना है कि एक दो दिन सख्ती के बाद प्रशासन दूसरे कामों में ध्यान देना आरंभ कर देगा और वाहनों की आवाजाही एक बार फिर आरंभ हो जाएगी।

सूत्रों ने यह भी कहा कि तत्कालीन जिलाधिकारी भरत यादव के द्वारा 2014 से लगातार ही झाबुआ पावर लिमिटेड प्रबंधन को नोटिस देकर सड़क दुरूस्त करने के निर्देश देता आया है पर इस तरह के नोटिस कागजी प्रक्रिया से ज्यादा कुछ नहीं है। कुछ दिनों में लोगों की चीख पुकार के कम होते ही प्रशासन भी इस ओर से आंखें फेर लेता है।