मई में हो सकते हैं निकाय चुनाव!

 

 

शासन ने नगरीय निकायों की सीमावृद्धि आदि कार्यक्रम किए घोषित

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। स्थानीय निकायों के चुनाव छः महीने आगे बढ़ सकते हैं। राज्य शासन के द्वारा स्थानीय निकायों के चुनावों को लेकर कार्यक्रम जारी कर दिया है। शासन के द्वारा अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि निकाय अध्यक्षों का चुनाव सीधे जनता के द्वारा किया जाएगा अथवा पार्षदों के द्वारा महापौर या अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा।

राज्य शासन के द्वारा नगरीय निकायों में वार्ड विभाजन, वार्ड की जनसंख्या निर्धारण एवं आरक्षण आदि के संबंध में संशोधित कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। अब नगर निगमों के महापौरों और नगर पालिका एवं नगर परिषद के अध्यक्षों के आरक्षण की प्रक्रिया को अगले साल 15 फरवरी तक पूरा किया जाएगा।

ज्ञातव्य है कि नगरीय निकायों की सीमा वृद्धि एवं संकुचन संबंधी प्राथमिक प्रकाशन 14 अगस्त को किया जा चुका है। इस कार्यक्रम के तहत जिलों के जिलाधिकारी प्रारंभिक प्रकाशन के उपरांत दावे और आपत्तियों को राज्य शासन को 30 अगस्त तक प्रेषित करेंगे। इनके निराकरण के उपरांत इसका अंतिम प्रकाशन 30 सितंबर को किया जाएगा।

इसके अलावा जिलाधिकारियों के द्वारा वार्ड की संख्या का निर्धारण के लिए अधिसूचना एवं वार्ड की सीमाओं के निर्धारण का प्राथमिक प्रकाशन 17 अक्टूबर को किया जाएगा। इसके उपरांत प्राप्त दावे और आपत्तियों को जिलों से राज्य शासन को 31 अक्टूबर तक भेजा जाएगा। इसका अंतिम प्रकाशन 15 नवंबर को किया जाएगा।

स्थानीय निकायों के मामले में जिला स्तर पर जिलाधिकारियों के द्वारा वार्ड के आरक्षण संबंधी कार्यवाही को 30 दिसंबर तक पूरा किया जाएगा। यह जानकारी जिलों से राज्य शासन को अगले साल 10 जनवरी तक भेजा जाएगा। इसके उपरांत वार्ड आरक्षण की अंतिम सूचना का प्रकाशन 30 जनवरी को किया जाएगा।

नगरीय कल्याण विभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि फरवरी माह में यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, किन्तु इसके बाद परीक्षाओं का दौर आरंभ हो जाएगा और मई माह तक चलेगा। इसे देखते हुए मध्य प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव मई माह में कराए जा सकते हैं।

प्रदेश कांग्रेस के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि कांग्रेस के द्वारा राज्य शासन को यह प्रस्ताव दिया है कि नगर निगमों के महापौर और नगर पालिका एवं नगर पंचायतों के अध्यक्षों का चुनाव जनता के द्वारा सीधे न किया जाकर पार्षदों के द्वारा किया जाए। अर्थात महापौर या अध्यक्ष को पहले पार्षद बनना होगा उसके बाद ही वह अध्यक्ष बनने की पात्रता रखेगा।

वर्तमान में स्थानीय निकाय चुनावों में मतदाताओं के द्वारा अपने वार्ड के पार्षद के साथ ही साथ अध्यक्ष का चुनाव सीधे किया जाता है। इसके अलावा उपाध्यक्ष का चुनाव पार्षदों के द्वारा किया जाता है। अब उपाध्यक्ष की तरह ही अध्यक्ष का चुनाव पार्षदों के द्वारा किया जा सकता है।