इंदौर जिला कोर्ट में ड्राइवर का बेटा बना सिविल जज

 

 

 

 

(ब्‍यूरो कार्यालय)

इंदौर (साई)। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट द्वारा आयोजित सिविल जज वर्ग-दो परीक्षा के परिणाम बुधवार को घोषित कर दिए गए। कुल 157 प्रतिभागी परिणाम में सफल हुए है। इनमें सामान्य वर्ग के 93, अन्य पिछड़ा वर्ग के 25, अजा के 29 व अजजा वर्ग के 10 उम्मीदवार सफल हुए हैं। इस बार छात्राओं का दबदबा रहा। इंदौर से 25 से ज्यादा प्रतिभागी जज बनने में सफल रहे हैं।

इनमें इंदौर जिला कोर्ट में 40 वर्ष से ड्राइवर गोवर्धनलाल बजाड़ (गुर्जर) के बेटे चेतन की ओबीसी वर्ग में 13वीं रैंक रही है। चेतन को 450 में से 257.5 अंक मिले हैं। चेतन के दादा भी कोर्ट में चौकीदार थे। चेतन का कहना है कि पिता ने पहले ही तय कर लिया था कि तीनों बेटों को कानूनी पढ़ाई कराएंगे। एक बेटे को जज बनाने पर ध्यान देंगे। दो भाई राम बजाड़ और योगेश बजाड़ वकील हैं।

कट ऑफ : रजिस्ट्रार (एग्जाम) जोगिंदर सिंह के मुताबिक, इस बार अनारक्षित वर्ग के लिए कट-ऑफमार्क्स 211.5, ओबीसी के लिए 200.5, एससी के लिए 181 व एसटी के लिए 180.5 रखा था। प्रतीक्षा सूची में अनारक्षित वर्ग के 18, ओबीसी के 5 व एससी के 6 आवेदक हैं।

 

लाइनमैन की बेटी भी बोलेगी ऑर्डर-ऑर्डर

रतलाम/शाजापुर। मालवा-निमाड़ अंचल की तीन बेटियां भी जज बनी हैं। इनमें शाजापुर की नीलम गुर्जर व पूजा विजयवर्गीय और नीमच की अंकिता पलास शामिल हैं। अंकिता रतलाम में जिला विधिक सहायता अधिकारी हैं। उन्होंने इंदौर से लॉ की परीक्षा पास की। 2015 में उनका चयन विधिक सहायता अधिकारी के पद पर हुआ और बड़वानी पदस्थ किया गया।

अगस्त 2017 में रतलाम पदस्थ किया गया। अंकिता ने बताया कि पांचवीं बार में सफलता मिली। पूजा विजयवर्गीय ने 15वीं रैंक पाई। शाजापुर के टांडा की नीलम गुर्जर का भी चयन हुआ है। पिता सिद्धनाथ गुर्जर सोनकच्छ में बिजली कंपनी में लाइनमैन हैं।

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