डेयरी संचालक की बेटी शबाना बनी जज

डेयरी संचालक की बेटी शबाना बनी जज

(ब्यूरो कार्यालय)

लखनादौन (साई)। जिला मुख्यालय से करीब 60 किमी दूर लखनादौन की बेटी और 38 किमी दूर खुर्सीपार के लाल ने कमाल किया है। दोनों ने सिविल जज बनकर नगर और गांव के साथ जिले को गौरवान्वित किया है।

दोनों की इस सफलता के बाद से उनको तथा परिजनों को बधाई देने का क्रम जारी है। लखनादौन निवासी शबाना खान डेयरी संचालक मो. खलील खान की पुत्री है। खुर्सीपार निवासी रविशंकर भलावी शिक्षक पीआर भलावी के पुत्र हैं।

बतौर शबाना पापा मुझे सिविल जज बनाना चाहते थे। मैं आकाशवाणी जबलपुर में उद्घोषक की आठ से 10 घंटे की नौकरी करने के बाद करीब नौ घंटे पढ़ाई करती थी। नौकरी और पढ़ाई में सामंजस्य बैठाया, लेकिन सफलता नहीं मिली। तीन वर्ष पूर्व नौकरी से इस्तीफा दिया और सुबह से देर रात तक बिना समय देखे पढ़ाई की। अब सिविल जज बनकर मैंने पापा का सपना पूरा कर दिया है। मैंने स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई लखनादौन में की। कानून की पढ़ाई जबलपुर में की। कॉलेज की पढ़ाई के दौरान लखनादौन में नौकरी की।

उन्होंने बताया कि जबलपुर में जब आर्थिक समस्या आई तो वहां भी मैंने आकाशवाणी में नौकरी शुरू किया था। मेरी सफलता में परिवार के अलावा एडवाकेट अमित जैन, एडवोकेट प्रियंका जैन, उमाकांत सोनी व वरुण चौहान सर का विशेष योगदान रहा। शबाना चार बहन व एक भाई में अपने मां-बाप की तीसरे नंबर की संतान है।

उसकी बड़ी बहन सलमा खान जिला न्यायालय सिवनी में डीडब्लू पद पर पदस्थ हैं। छोटी बहन शबनम खान खरगौन में स्टॉफ नर्स हैं। दूसरे नंबर की बहन सलमा खान नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है। मां एच निशा खान गृहिणी है। इकलौता भाई कौशर खान पिता के व्यवसाय में हाथ बंटाता है।

यदि जीवन में आपने कोई गोल्य डिसाइड किया है तो उसमें भटकाव नहीं होना चाहिए। एक समय लगातार प्रयास के बाद जब सफलता नहीं मिल रही थी तो मैंने एलएलएम करने के बारे में सोचा। इसबीच भूपेश मिश्रा सर और पापा ने मेरा मनोबल बढ़ाया। बोला एक मौका और लो। फिर मैंने असफलता को सफलता की सीढ़ी बनाई और जज बन गई।

शबाना खान,

चयनित सिविल जज.