पति से अलग रह रही महिला को ससुराल के घर में मिले हक

 

 

 

 

सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार

(ब्‍यूरो कार्यालय)

नई दिल्‍ली (साई)। पति से अलग होने के बाद भी किसी महिला को ससुराल के घर में रहने का हक है या नहीं, इस पर सर्वोच्च अदालत ने विचार करने का निर्णय लिया है। जस्टिस एन वी रमन्ना, जस्टिस एम एम शांतानागोदार और जस्टिस अजय रस्तोगी ने एक मुस्लिम महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। महिला ने पति के तलाक देने के बाद ससुराल वालों द्वारा घर से निकालने के खिलाफ याचिका दाखिल की है।

मुस्लिम महिला की याचिका पर SC ने केंद्र को दिया नोटिस

घरेलू हिंसा से रक्षा कानून के तहत महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए 3 जजों की बेंच ने केंद्र को नोटिस जारी किया है। मुस्लिम महिला ने अपनी याचिका में दावा किया कि 15 साल पहले उसका पति 3 बच्चों के साथ उसे छोड़कर यूके चला गया। महिला का आरोप है कि 2004 में उसके पति ने उसे छोड़ दिया और उसके ससुरालवालों ने बच्चे सहित उसे घर से निकाल दिया।

पति ने विदेश से फोन पर दिया 3 तलाक

याचिकाकर्ता 40 साल की शबाना अहमद 3 बच्चों की मां हैं। महिला का कहना है कि 15 साल पहले उनके पति यूके चले गए और फिर लौटकर नहीं आए। महिला का कहना है कि 2007 में पति ने फोन पर तीन तलाक दे दिया और उसके बाद ससुरालवालों मे उसे बेटी के साथ घर से निकाल दिया। महिला के 2 बच्चे अभी भी ससुराल में रह रहे हैं। 2018 में शबाना ने ट्रायल कोर्ट में ससुराल के घर में रहने का हक दिलाने के लिए याचिका दाखिल की थी। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

शबाना के वकील ने SC के फैसले पर पुनर्विचार की अपील की

हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए शबाना के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के 2007 के फैसले पर पुनर्विचार की गुजारिश की। 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि तलाक के बाद ससुराल के घर में हिस्सा मांगने का अधिकार महिला का नहीं होता है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से गुजारिश की है कि पति के छोड़ने के बाद से वह अपनी जरूरतों के लिए दोस्तों और वकीलों पर निर्भर हैं। महिला का कहना है कि मेरे पैरंट्स की मौत हो चुकी है और अब मेरे पास जीविका के लिए कोई साधन नहीं है।