सोयाबीन में गर्डल बीटल, पीला मोजेक रोग का प्रकोप

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। कृषि विज्ञान केंद्र, सिवनी के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डांॅ. शेखर सिंह बघेल, वरिष्ठ कीट वैज्ञानिक, डांॅ. एपी भण्डारकर एवं खाद्य वैज्ञानिक जीके राणा ने विकासखण्ड सिवनी के ग्राम सीलादेही, नंदौरा, जमुनिया एवं सुखवाहा गांवों में कृषकों के प्रक्षेत्र पर निरीक्षण किया गया।

कृषि वैज्ञानिकों ने भ्रमण के दौरान खेतों में लगी सोयाबीन में कहीं-कहीं गर्डल बीटल एवं पीला मोजेक रोग का प्रकोप पाया एवं मक्का की फसल में फाल आर्मी वर्म कीट का प्रकोप देखा गया।

कीट वैज्ञानिक डॉ. एपी भंडारकर ने त्वरित समाधान करने के लिए कृषकों को सोयाबीन में गर्डल बीटल एवं रसचूसक कीटों से बचाव के लिए ट्रायजोफॉस 40 इसी एक लीटर या प्रोफेनोफॉस 44 इसी. 750 मिली या फ्लूबेन्डामाइट 480 एससी 200 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

मक्के में फाल आर्मी वर्म के नियंत्रण के लिए फ्लूबेन्डामाइट 480 एससी 150 मिली या स्पाइनोसेड 45 ईसी 250 ग्राम या एमामेक्टिन बेंजोएट पांच प्रतिशत एसजी 250 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। साथ ही धान में ब्लास्ट के नियंत्रण के लिए कार्बेन्डाजिम 500 ग्राम या ट्राइसायक्लाजोल 500 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

कृषि विज्ञान केंद्र, के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. शेखर सिंह बघेल ने बताया कि वर्षाकाल में किसानों को ध्यान रखना होगा कि खेतों में पानी का भराव न हो साथ ही जल निकासी का उत्तम प्रबंधन करें एवं वर्षा जल का समुचित संरक्षण करने की बात कही। खाद्य वैज्ञानिक जीके राणा ने कृषकों को बताया की वर्षाकाल में बीमारियों से बचाव के लिए घर के आस-पास साफ-सफाई रखें, एवं गाजर घास का प्रबंधन के साथ ही स्वच्छ जल को पीने में उपयोग की सलाह दी।

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