पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था

 

 

पाकिस्तान सरकार ने अगले चार वर्ष के लिए अपने जो मुख्य लक्ष्य तय कर रखे हैं, उनमें एक लक्ष्य आर्थिक विकास भी है। हालांकि दुनिया भर की तमाम अर्थव्यवस्थाओं में गिरावट का दौर जारी है। मगर आज पाकिस्तान में सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक – ए – इंसाफ (पीटीआई) के ऊपर एक बड़ी जिम्मेदारी है कि वह आर्थिक हालात को बदले और अभी की तुलना में ज्यादा कौशल का परिचय दे। अमेरिका और चीन के बीच तेजी से बढ़ता व्यापार युद्ध भी दुनिया में विकास को बाधित कर रहा है। इसकी वजह से मुद्रास्फीति बढ़ रही है और उत्पादकता घट रही है।

अमेरिका का ट्रंप प्रशासन ईरान पर पाबंदियां और चीन पर शुल्क लादने में लगा हुआ है, इसका जवाब भी उसे ठीक उसी तरह से मिल रहा है। वैसे व्यापार गतिरोध दूर करने के लिए अमेरिकी और चीनी राष्ट्रपति एक – दूसरे से मिले भी थे। इन दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच समझौते की आशा भी थी, लेकिन वार्ता में विफलता हाथ लगी। इसका बहुत प्रतिकूल असर विश्व बाजार पर पड़ा है। इस व्यापार युद्ध से परे देखें, तो दूसरी अर्थव्यवस्थाएं भी अपने दम पर बहुत आशा के संकेत नहीं दे रही हैं। जर्मनी और स्वीडन जैसे यूरोपीय देशों से भी अच्छी खबरें नहीं मिल रही हैं। जर्मनी में ऑटो या वाहन बिक्री तेजी से गिर रही है और पिछले दस वर्षों से जर्मनी की अर्थव्यवस्था में जो रफ्तार दिख रही थी, वह थमती हुई लग रही है।

पाकिस्तान के अपने उद्यम गिरते दिख हुए रहे हैं। ये उद्योग निर्यात बढ़ाने में नाकाम हो रहे हैं। सरकार को यह ध्यान देने की जरूरत है कि वैश्विक विकास में गिरावट का लाभ वह कैसे ले सकती है। विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए अपने श्रम बाजार खोलकर लाभ लिया जा सकता है। इससे पाकिस्तान में न केवल रोजगार बढ़ेंगे, घरेलू कंपनियों को भी जरूरी मदद मिलेगी। जिन हाथों में देश की अर्थव्यवस्था दी गई है, वे उतने भाग्यशाली नहीं हैं। अपने भाग्य को चमकाने के लिए हमें वैश्विक संदर्भ को समझना होगा। यदि पाकिस्तान ने अपनी आर्थिक नीति में ज्यादा लचीला रवैया नहीं अपनाया, तो बहुत जल्दी ही हमारा वैश्विक गिरावट का शिकार होना तय है। (द नेशन, पाकिस्तान से साभार)

(साई फीचर्स)