ठूंठ के मानिंद खड़े मुँह चिढ़ाते यातायात सिग्नल!

(शरद खरे)

शहर की यातायात व्यवस्था बदहाल है। शहर में यातायात नियंत्रित करने के लिये लगाये गये ट्रैफिक सिग्नल कभी चालू रहते हैं तो कभी बंद। अधिकांश समय ये सिग्नल्स बंद ही नज़र आते हैं। स्थिति यह है कि नगर पालिका की पिछली परिषद के द्वारा दिसंबर 2013 में शहर के चार स्थानों पर ट्रैफिक सिग्नल संस्थापित करवाये गये थे, जो कभी चालू होते हैं तो कभी बंद ही दिखायी देते हैं।

भाजपा शासित वर्तमान नगर पालिका परिषद को भी चुने हुए पाँच साल पूरे होने को आ रहे हैं, पर नयी परिषद के द्वारा भी इन्हें व्यवस्थित तरीके से आरंभ कराने की सुध नहीं ली गयी है। शहर में नगर पालिका तिराहे के अलावा सर्किट हाऊस चौराहे, कचहरी चौक, छिंदवाड़ा चौक एवं बाहुबली चौराहे पर लगभग 30 लाख रुपये की लागत से चार ट्रैफिक सिग्नल लगवाये गये थे।

इन सिग्नल्स को कब चालू किया गया, शायद ही कोई जानता होगा। ये सिग्नल जब चाहे तब बंद हो जाते हैं। लोगों का कहना है कि जैसे-तैसे लोगों की इन यातायात सिग्नल्स पर रूकने की आदत पड़ती है, वैसे ही ये सिग्नल बंद हो जाते हैं। सिंधिया तिराहे से गाँधी भवन जाने वाले मार्ग पर तो सिग्नल ही नहीं है। ऐसा ही हाल कचहरी की ओर जाने वाले मार्ग का भी है जहाँ के लिये कोई संकेतक नहीं लगाया गया है।

बार-बार इन यातायात सिग्नलों को बंद क्यों किया जाता है या वे स्वतः ही हो जाते हैं, इसकी पालिका के पास कोई ठोस वजह नहीं है। शहर में लगे पाँच में से चार सिग्नल मॉडल रोड पर ही लगे हुए हैं। मॉडल रोड का कार्य तय सीमा से लगभग छः वर्ष ज्यादा होने को आया है। मजे की बात तो यह है कि मॉडल रोड पर लगे चार में से मात्र एक सिग्नल ही चालू दिखता है।

शहर में लाखों रुपये खर्च करके लगाये गये ट्रैफिक सिग्नल के पाँच साल से ज्यादा समय होने के बाद भी व्यवस्थित तरीके से आरंभ नहीं कराये जाने पर नागरिकों को भी आश्चर्य हो रहा है। लोगों का कहना है कि यदि इन सिग्नल्स को ठीक से आरंभ नहीं करवाना था तो लाखों रुपये क्यों फूंक दिये गये।

लोगों का कहना है कि सड़क किनारे ठूंठ के मानिंद खड़े ये सिग्नल्स देखकर लोगों के मन में पालिका के प्रति नाराज़गी बढ़े तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिये। उनका कहना है कि इन यातायात सिग्नल्स के कारण जाम की स्थिति निर्मित हो जाती है।

बाहुबली चौराहे के व्यवसायियों का मानना है कि चौराहे से सर्किट हाऊस मार्ग पर दो तीन साल पहले नो पार्किंग का बोर्ड लगा था, जिसे पता नहीं क्यों हटा दिया गया है और यातायात सिग्नल भी यहीं है। लोगों की मानें तो आये दिन सड़कों पर खड़े वाहनों से दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। पुलिस के द्वारा यातायात नियंत्रण के नाम पर हर स्थान पर बेरीकेट्स रख दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से यातायात सिग्नल स्थापित किये गये हैं उससे परेशानियां बढ़ी ही हैं।

इधर, कचहरी चौराहे पर बैंक है, वहाँ से कलेक्ट्रेट और न्यायालय जाने का रास्ता है, स्कूल के विद्यार्थी भी यहाँ से बहुतायत में निकलते हैं। यहाँ के यातायात सिग्नल अधिकांश समय बंद होने के कारण शालाओं की छुट्टी के समय जाम की स्थिति बन जाती है। यातायात सिग्नल के अभाव में अक्सर ही दुर्घटनाएं घटित होती हैं। यहाँ का सिग्नल भी जब चाहे तब चालू और जब चाहे तब बंद ही रहता है।

पालिका के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि शहर के बंद पड़े यातायात सिग्नल्स के बारे में जब सीएम हेल्प लाईन पर शिकायत की गयी तो पालिका के अधिकारियों के द्वारा यह जवाब दिया जाकर शिकायत को बंद कर दिया गया कि तकनीकि खराबी के चलते सिग्नल बंद हैं, जिन्हें जल्द ही आरंभ करवा दिया जायेगा।

इन शिकायतों के बाद अब ये यातायात सिग्नल बंद क्यों हैं, इस बारे में पूछने की जहमत पालिका में विपक्ष में बैठी काँग्रेस के पार्षदों ने भी नहीं उठायी है, जिससे काँग्रेस संगठन की मंशा पर भी प्रश्न चिन्ह लगना स्वाभाविक ही है। काँग्रेस का नगर और जिला संगठन भी इस मामले में मौन क्यों है, यह प्रश्न भी अनुत्तरित ही है।

विधान सभा चुनावों के पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सिवनी आये थे। उनके आगमन की पूर्व संध्या पर सर्किट हाऊस चौराहे के यातायात सिग्नल अचानक चालू हो गये थे और उनके जाते ही ये सिग्नल फिर पहले की ही तरह बंद हो गये हैं।

सिवनी शहर में लगे यातायात सिग्नल्स की संस्थापना निश्चित तौर पर यातायात पुलिस या परिवहन विभाग के अफसरान से सलाह मशविरा या यातायात समिति को विश्वास में लिये बिना करवायी गयी है, जिसके चलते ये सिग्नल्स लोगों के लिये सुविधा की बजाय परेशानी का सबब ज्यादा बनते दिख रहे हैं।

इस तरह के अव्यवस्थित यातायात सिग्नल्स के लगाये जाने के बाद भी परिवहन विभाग या यातायात पुलिस के द्वारा शायद ही कभी नगर पालिका परिषद से इस संबंध में पत्राचार किया गया हो! देखा जाये तो शहर की यातायात व्यवस्था दुरूस्त करने की जवाबदेही यातायात पुलिस की है और यातायात पुलिस उन सभी कारकों जिनके कारण यातायात प्रभावित हो रहा है के संबंध में संबंधित विभाग से सवाल जवाब करने का अख्तियार रखती है। इस मामले में संवेदनशील जिलाधिकारी प्रवीण सिंह अढ़ायच एवं जिला पुलिस अधीक्षक कुमार प्रतीक से ध्यानाकर्षण की अपेक्षा की जा सकती है।

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