नए संसद भवन में मंत्रियों की तरह सभी सांसदों को मिलेगा अलग कमरा

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। आजादी की 75वीं सालगिरह से पहले तैयार होने वाले नए संसद भवन में दोनों सदनों के सभी सदस्यों को मंत्रियों के चेंबर की तरह अलग से कमरा दिए जाने की योजना है। इससे उन्हें अपने विधायी कार्यों की तैयारी करने का उपयुक्त स्थान मिल सकेगा। संसद भवन की मौजूदा व्यवस्था में सिर्फ मंत्रियों को ही अलग कमरा मिलता है। संसद सदस्यों को अभी विधायी कार्यों के लिए आवश्यक अध्ययन करने के लिए या किसी से मिलने के लिए मंत्रियों के चेंबर में शरण लेनी पड़ती है या फिर पुस्तकालय या केंद्रीय कक्ष एवं अन्य स्थानों का रुख करना पड़ता है।

दरअसल, ब्रिटिश काल में निर्मित संसद भवन और केन्द्रीय सचिवालय सहित अपने विभिन्न मंत्रालयों की इमारतें मौजूदा समय की जरूरतों के हिसाब से नाकाफी साबित हो रही हैं। इसके मद्देनजर सरकार ने राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक, 3 किमी के दायरे में मौजूद देश की शासन व्यवस्था के शीर्ष सत्ता प्रतिष्ठानों (संसद भवन और केन्द्रीय सचिवालय) का कायाकल्प कर नया स्वरूप देने की महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की है।

इसे अंजाम दे रहे आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 90 साल की ऐतिहासिक विरासत को समेटे संसद भवन की इमारत के ऐतिहासिक महत्व से इनकार नहीं किया जा सकता है, लेकिन यह भी सही है कि बदलते वक्त की मौजूदा जरूरतों को यह इमारत पूरा नहीं कर पा रही है। इसमें सांसदों के लिए स्थान का अभाव अहम समस्या है।

उन्होंने बताया कि अमेरिका और यूरोप के तमाम विकसित देशों में सभी संसद सदस्यों को संसद भवन में अलग से कमरा मिलता है। वहीं, दुनिया के सबसे विशाल लोकतंत्र के सांसदों को संसद भवन में ही अपने विधायी कामकाज के लिए सदन में निर्धारित सीट के अलावा कोई ऐसा निश्चित स्थान नहीं है जहां बैठकर वे किसी से मिल सकें या सदन में जाने से पहले अध्ययन और दस्तावेजी कामों की तैयारी कर सकें।

समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सदस्य चौधरी सुखराम सिंह ने संसद भवन को नए सिरे से बनाने या इसका पुनर्विकास करने की सरकार की परियोजना को स्वागतयोग्य बताते हुये इसमें सभी सदस्यों के लिए अलग चेंबर की व्यवस्था करने के विचार को कारगर पहल बताया। उन्होंने बताया कि मौजूदा व्यवस्था में मंत्रियों के अलावा विभिन्न दलों के नेता सदन को अलग कक्ष मिलता है। ऐसे में एक या दो सदस्यों वाले छोटे दलों के नेता और सदस्यों को स्थान के अभाव में खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

उल्लेखनीय है कि आवास एवं शहरी मामलों के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप सिंह पुरी ने भी शुक्रवार को ओद्यौगिक संगठन फिक्की द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में संसद भवन के पुनर्विकास की योजना की पुष्टि की। पुरी ने कहा कि संसद भवन और संयुक्त केन्द्रीय सचिवालय को नया रूप देने के काम को 2024 तक पूरा कर लिया जाएगा। परियोजना से जुड़े मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि सबसे पहले दिसंबर 2015 में तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने मंत्रालय को पत्र लिखकर नए संसद भवन के निर्माण की संभावनाओं का पता लगाने का अनुरोध किया था।

महाजन द्वारा संसद में जगह की कमी और भावी परिसीमन में दोनों सदनों की सदस्य संख्या एक हजार तक पंहुचने की संभावना के मद्देनजर यह समस्या और अधिक गहराने की भी आशंका जताई थी। इसे देखते हुए तत्कालीन शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने अधिकारियों से नए भवन के लिए जगह तलाशने को कहा था। संसद भवन में स्थान के अभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विभिन्न दलों के नेता अपनी पार्टी के लिए कमरों के लिए झगड़ते रहते हैं। अगस्त 2014 में टीडीपी और तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों के बीच कमरे के आवंटन को लेकर आपसी विवाद इतना बढ़ गया था कि इसकी शिकायत महाजन के पास तक पंहुच गई।

संसद में स्थान के अभाव की समस्या को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने भी पिछले महीने पांच अगस्त को उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अगस्त 2022 तक संसद भवन को विस्तार देने का अनुरोध किया। इस पर मोदी ने 20 अगस्त को घोषणा की कि सरकार, संसद भवन को आधुनिक रूप देने सहित अन्य सभी संभावनाएं तलाश रही है।

गौरतलब है कि मौजूदा व्यवस्था में लोकसभा में अधिकतम सदस्य संख्या 550 और राज्यसभा में 250 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था है। दोनों सदनों के अलावा संसद भवन में मंत्रियों और विभिन्न समितियों के अध्यक्षों सहित कुल 180 सदस्यों के कार्य निष्पादन हेतु अलग व्यवस्था है। सभी पक्षों में आमराय है कि यह व्यवस्था मौजूदा परिस्थितियों एवं भविष्य के लिहाज से नाकाफी है। दुनिया का सबसे पुराना संसद भवन इटली का है। 1505 में निर्मित इस संसद भवन की इमारत, समय के साथ तमाम बदलावों के बीच आज भी कार्यरत है।

इसके अलावा वर्तमान में कार्यरत संसद भवन की पुरानी इमारतों में 1800 में निर्मित अमेरिकी संसद, 1814 में निर्मित स्पेन की संसद, 1870 में निर्मित ब्रिटिश संसद और 1884 में निर्मित दक्षिण अफ्रीकी संसद शामिल है। भारतीय संसद भवन की आधारशिला 12 फरवरी, 1921 को रखी गई थी। मशहूर वास्तुकारों, एडविन लुटियन्स और हर्बर्ट बेकर द्वारा तैयार डिजायन पर आधारित संसद भवन, लगभग छह साल में 83 लाख रुपये की लागत से 18 जनवरी 1927 को बनकर तैयार हुआ था।

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