श्राद्धों की समाप्ति के 10 दिन जागेंगे भगवान विष्णु

 

इसके बाद आरंभ हो जायेंगे शादी ब्याह

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। पितरों की तृप्ति के लिये किये जाने वाले श्राद्ध यानि पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष इस वर्ष आरंभ हो चुका है। ऐसे में अब कई प्रकार के शुभ कार्यों में रोक लग गयी है।

इससे पहले अभी चल रहे चातुर्मास के तहत विवाह समेत अन्य माँगलिक कार्य वैसे ही रूके हुए थे, वहीं अभी विवाह पर श्राद्ध पक्ष में भी रोक जारी रहेगी। वहीं अब विवाह देवउठनी एकादशी यानि 08 नवंबर, से आरंभ होंगे।

पितरों को समर्पित अश्विन मास की भाद्रपद पूर्णिमा से अश्विन माह की अमावस्या तक इसे मनाया जाता है। 16 दिनों के लिये पितृ घर में विराजमान होते है जोकि हमारे वंश का कल्याण करते हैं। इस बार पितृ पक्ष 13 सितंबर से आरंभ हो चुके हैं जो कि 28 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होंगे।

वहीं पितृ पक्ष में पितरों की तृप्ति के लिये किये जाने वाले श्राद्ध कर्म के दौरान इन 16 दिनों में कोई भी माँगलिक कार्य जैसे विवाह, उपनयन संस्कार, मुण्डन, गृह प्रवेश आदि वर्जित माने गये हैं। यहाँ तक की श्राद्ध पक्ष में नयी वस्तुओं की खरीद भी वर्जित है। अतः माना जाता है कि इन 16 दिनों में आपको नया मकान, वाहन आदि का क्रय नहीं करना चाहिये। वहीं खास बात ये भी है कि ये पितृ पक्ष चातुर्मास के अंतर्गत आते हैं।

क्यों वर्जित होते हैं शुभ कार्य : ज्योतिषाचार्यों के अनुसार श्राद्धपक्ष का संबंध मृत्यु से है इस कारण यह अशुभ काल माना जाता है। जैसे अपने परिजन की मृत्यु के पश्चात हम शोकाकुल अवधि में रहते हैं और अपने अन्य शुभ, नियमित, मंगल, व्यवसायिक कार्यों को विराम दे देते हैं, वही भाव पितृपक्ष में भी जुड़ा है। इस अवधि में हम पितरों से और पितर हमसे जुड़े रहते हैं। अतः अन्य शुभ – माँगलिक शुभारंभ जैसे कार्यों को वंचित रखकर हम पितरों के प्रति पूरा सम्मान और एकाग्रता बनाये रखते हैं।

पूरे चार माह बंद रहते हैं विवाह : हिन्दू पंचांग के अनुसार चातुर्मास 04 महीने की अवधि है, जो आषाढ़ शुक्ल देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होकर कार्तिक शुक्ल देवउठनी एकादशी तक चलती है। हिन्दू धर्म में ये 04 महीने भक्ति, ध्यान, जप, तप और शुभ कर्मों के लिये महत्वपूर्ण माने जाते हैं। हालांकि इन 04 महीनों के दौरान विवाह समेत अन्य माँगलिक कार्य नहीं होते हैं।

दरअसल देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु 04 माह के लिये क्षीर सागर में शयन करते हैं, इसलिये इस अवधि में विवाह, मुण्डन, गृह प्रवेश समेत अन्य शुभ कार्य नहीं किये जाते हैं। वहीं कार्तिक मास में आने वाली देवउठनी एकादशी पर जब भगवान विष्णु निंद्रा से जागते हैं, उसके बाद विवाह कार्य आरंभ होते हैं। इस बार देवउठनी एकादशी 08 नवंबर को है।

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