पेंच नेशनल पार्क की सुरक्षा के लिए प्रथक होगा दल!

 

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। बाघों की सुरक्षा को लेकर चिंतित राज्य सरकार ने आखिर टाइगर स्ट्राइक फोर्स के गठन की तैयारी कर ली है। वन विभाग ने फोर्स के गठन का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है, जो मंजूरी के लिए कैबिनेट भेजा जा रहा है।

पहले चरण में पेंच, बांधवगढ़, और कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा की जिम्मेदारी फोर्स को सौंपी जाएगी। इसके लिए वनरक्षकों की भर्ती होगी, जो 40 साल की उम्र तक फोर्स में रहेंगे और फिर 62 साल की उम्र तक मैदानी अमले के रूप में विभाग में काम करेंगे। फोर्स को पॉवरफुल बनाने के लिए शस्त्र चलाने के अधिकार भी दिए जा रहे हैं।

ज्ञातव्य है कि आठ साल बाद प्रदेश टाइगर स्टेट बना है। प्रदेश में पिछले साल हुई गिनती में 526 बाघ मिले हैं। इसके बाद सरकार की बाघों को लेकर चिंता और जिम्मेदारी बढ़ गई है। यही कारण है कि केंद्र सरकार के वर्ष 2012 के प्रस्ताव पर अमल करते हुए राज्य सरकार टाइगर स्ट्राइक फोर्स का गठन कर रही है। वैसे तो प्रदेश के सभी छह टाइगर रिजर्व में फोर्स गठित की जानी है, लेकिन पहले चरण में तीन टाइगर रिजर्व लिए जा रहे हैं।

तीनों पार्क में एसीएफ के नेतृत्व में एक-एक कंपनी तैनात की जाएंगी। एक कंपनी 112 लोगों की रहेगी। इसमें तीन रेंजर, 22 उप वनपाल और 36 वनरक्षक रहेंगे। सरकार फोर्स में तैनात कर्मचारियों के वेतन और भत्तों पर करीब 10 करोड़ रुपए सालाना खर्च करेगी। जबकि संसाधनों पर 6.60 करोड़ रुपए एक बार खर्च किए जाएंगे। फोर्स पार्क संचालक की निगरानी में काम करेगी।

विभाग करेगा वनरक्षकों की भर्ती : फोर्स का गठन रंगरुटों की नियुक्ति को लेकर अटका हुआ था। सात साल पहले भी वन विभाग ने फोर्स के गठन का प्रयास किया था, लेकिन तब रंगरूटों की नियुक्ति की मंजूरी नहीं मिली थी। पुलिस विभाग भी प्रतिनियुक्ति पर आरक्षक देने को तैयार नहीं हुआ।

इस बार विभाग ने वनरक्षकों की भर्ती का प्रस्ताव तैयार किया है। विभाग 18 से 25 साल के युवकों की भर्ती करेगा। उन्हें सेना के जवानों की तरह ट्रेनिंग दी जाएगी और फिर पार्क में पदस्थ किया जाएगा, जो 40 साल की उम्र तक फोर्स में रहेंगे। इसके बाद वे विभाग में आकर नौकरी की अवधि पूरी करेंगे। इस भर्ती को सामान्य प्रशासन विभाग के आयुसीमा के बंधन से मुक्त रखा जाएगा।

40 फीसदी राशि देगी राज्य सरकार : फोर्स के गठन और संचालन पर खर्च होने वाली राशि में से 40 फीसदी राशि राज्य सरकार खर्च करेगी। जबकि केंद्र सरकार 60 फीसदी राशि देगी। वर्ष 2012 में केंद्र सरकार ने सौ फीसदी राशि देने का प्रस्ताव दिया था। तब राज्य सरकार ने प्रस्ताव नहीं माना। जबकि कर्नाटक सरकार ने केंद्र सरकार के निर्देश मानते हुए फोर्स का गठन कर लिया था। इसी के बाद कर्नाटक को टाइगर स्टेट का दर्जा मिला था।

शस्त्र चलाने की रहेगी छूट : प्रस्ताव में फोर्स को शस्त्र चलाने की छूट देने का प्रावधान भी किया जा रहा है। फोर्स जैसे अधिकार तो नहीं होंगे, लेकिन आत्मरक्षा की स्थिति में गोली चालन करने और उससे किसी को नुकसान होने पर पहले जांच कराने का प्रावधान रहेगा। यदि जांच में वनरक्षक की ओर से परिस्थितियां निर्मित न होते हुए गोली चलाना पाया जाता है तो ही संबंधित के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होगी।

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