कल तक थे नियंत्रणकर्त्ता अब रहेंगे नियंत्रण में!

 

 

स्वास्थ्य विभाग के अजब गजब खेल से हो रही किरकिरी!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। जिले के स्वास्थ्य विभाग में अजब गजब परंपराएं चल रही हैं। यह दूसरा मौका होगा जब जिले भर के स्वास्थ्य विभाग के अमले को नियंत्रण करने वाले अधिकारी को अपने अधीनस्थ अधिकारी के नियंत्रण में ही पदस्थ कर दिया गया हो। सिवनी के निवासी इस अजब गजब परंपरा को देखकर अचंभित हुए बिना नहीं हैं।

ज्ञातव्य है कि मंगलवार को राज्य शासन के द्वारा जारी आदेश के तहत प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.करूणेश सिंह मेश्राम को सीएमएचओ के प्रभार से हटाकर जिला चिकित्सालय में बतौर रेडियोलॉजिस्ट पदस्थ किया गया है। वैसे भी जिला चिकित्सालय, लंबे समय से रेडियोलॉजिस्ट के बिना ही चल रहा था।

सीएमएचओ कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि कल तक डॉ.के.सी. मेश्राम के द्वारा स्वास्थ्य विभाग के अधीन जिले में संचालित समस्त कार्यालयों का नियंत्रण और अधीक्षण किया जाता था। अब इस आदेश के तहत डॉ.मेश्राम का कल तक जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन पर नियंत्रण रहता था वे अब उनके अधीन उनके आदेशों का पालन करने बाध्य होंगे।

इसके पहले डॉ.राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी थे तब उन्हें इस पद से हटाकर जिला अस्पताल का सिविल सर्जन बनाया गया था। उनके स्थान पर डॉ.के.सी. मेश्राम को सीएमएचओ बनाया गया था। इसके उपरांत डॉ.वी.के. नावकर को सिविल सर्जन बनाने के आदेश जारी हुए थे, किन्तु डॉ.आर.के. श्रीवास्तव ने सेवानिवृत्ति तक यह पद नहीं छोड़ा था।

इस आदेश में सिवनी के प्रभारी सिविल सर्जन रहे डॉ.राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव को जिला अस्पताल में पदस्थ किया गया था। यह दूसरा मामला है जब सिवनी में ही पदस्थ रहने वाले प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को जिला अस्पताल में पदस्थ किया गया हो।

सीएमएचओ कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि डॉ.के.सी. मेश्राम के द्वारा लगभग चार – चार माह के अंतराल में बार – बार झोला छाप चिकित्सकों के खिलाफ कार्यवाही के लिये आदेश जारी किये गये थे। इस आदेश में जिले में चिकित्सा करने वाले समस्त चिकित्सकों को उनके प्रमाण पत्र आदि जमा करवाये जाने के निर्देश दिये जाते थे, किन्तु उनकी बतौर सीएमएचओ पदस्थापना के दौरान एक बार भी इन आदेशों पर न तो अमली जामा पहनाया गया और न ही किसी के खिलाफ उन्होंने कार्यवाही ही की।

सूत्रों का कहना है कि बारापत्थर में महात्मा गाँधी स्कूल के बाजू में एक सरकारी आवास है। इस आवास को अस्सी के दशक तक सिविल सर्जन के लिये ईयर मार्क किया गया था। इसके बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का पद सृजित होने के बाद इस आवास को सीएमएचओ के लिये ईयर मार्क कर दिया गया था। डॉ.मेश्राम के द्वारा भी पूर्ववर्ती सीएमएचओ रहे अधिकारियों की तरह इस आवास को रिक्त कराने का प्रयास करने की बजाय किराये के मकान में रहना ही मुनासिब समझा गया।

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