लगे हाथ चालू करवा दिये जायें सिग्नल!

 

 

(शरद खरे)

नगर पालिका चुनाव इस साल के अंत में निर्धारित हैं, पर हो सकता है चुनाव अगले साल हो पायें। नगर पालिका की इस परिषद का कार्यकाल पूरा होने में महज तीन माह से भी कम समय बचा है इसके बाद भी नगर पालिका के द्वारा न तो मॉडल रोड को पूरा किया जा सका है, न ही जलावर्धन योजना ही परवान चढ़ पायी है। और तो और लाखों रूपये की लागत से संस्थापित कराये गये यातायात सिग्नल्स भी ठूंठ के मानिंद ही खड़े नज़र आ रहे हैं।

आने वाले दिनों में शहर सरकार आपके द्वारा योजना का आगाज़ भी किया जाने वाला है। शहर में जब अधिकारी इस योजना के तहत शिविर लगायेंगे तब साफ सफाई, आवारा जानवर, गंदा पेयजल, जर्जर सड़कें, बंद पड़े यातायात सिग्नल आदि की शिकायतों से अधिकारियों को रूबरू होना पड़ सकता है।

यह राहत की बात मानी जा सकती है कि कम से कम शहर सरकार के लोगों के द्वार तक पहुँचने के पहले जिलाधिकारी प्रवीण सिंह के द्वारा नगर पालिका को चेतावनी दी गयी है। जिलाधिकारी की चेतावनी का असर तो दिख रहा है, पर वैसा असर नहीं दिखायी दे रहा है जिसकी उम्मीद की जा रही थी।

शहर में मॉडल रोड पर सड़कों के बीच लगी लाईट सालों बाद भी चालू नहीं हो पायी है। इन लाईट्स के लिये लगाये गये खंबे भी अब जंग के हवाले हो चुके हैं। इन्हें चालू क्यों नहीं करवाया जा रहा है यह भी अबूझ पहेली ही बनकर रह गया है। मॉडल रोड अब तक पूर्ण क्यों नहीं हो पायी है यह बात भी शायद ही कोई जानता हो।

यही हाल जलावर्धन योजना का है। जलावर्धन योजना का काम भी अब तक पूरा नहीं हो पाया है। इस योजना में ठेकेदार को पालिका के द्वारा बार-बार भुगतान तो किया जा रहा है पर जलावर्धन योजना का काम नियम कायदों के अनुरूप हुआ है अथवा हो भी रहा है या नहीं इसे देखने सुनने की फुर्सत किसी को नज़र नहीं आ रही है।

शहर में आधा दर्ज़न स्थानों पर लगभग तीस लाख रूपये से ज्यादा की लागत से संस्थापित कराये गये यातायात सिग्नल्स के हालात किसी से छुपे नहीं हैं। बिना जेब्रा क्रॉसिंग सिवनी में लगे यातायात सिग्नल अपने आप में अजूबे से कम नहीं माने जा सकते हैं। इनमें से अधिकांश लंबे समय तक बंद ही रहे हैं। इन यातायात सिग्नल्स के सुधार पर कितनी राशि व्यय कर दी गयी इस बारे में भी पालिका मौन ही साधे हुए है।

अब जबकि जिलाधिकारी की प्राथमिकता में नगर पालिका परिषद आती दिख रही है इस लिहाज़ से संवेदनशील जिलाधिकारी प्रवीण सिंह से अपेक्षा की जा सकती है कि वे शहर में ठूंठ के मानिंद खड़े यातायात सिग्नल्स को या तो चालू करवाने के मार्ग प्रशस्त करवायें अथवा जिस भी अधिकारी के कार्यकाल में इन्हेें संस्थापित करवाया गया था उनके वेतन भत्तों से इसमें व्यय की गयी राशि की वसूली की कार्यवाही की जाये!

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