हवा में तैरते रेत के कण!

 

 

 

(शरद खरे)

बारिश का दौर थमने के बाद अब शहर की सड़कों पर चलने वाले दो पहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वाले लोगों के सामने एक नया संकट आन खड़ा हुआ है, वह है आगे जाने वाले वाहनों के कारण उड़ने वाले रेत और धूल के कण। यह समस्या आज नहीं खड़ी हुई है सालों से बारिश के बाद इस तरह की समस्या से लोग दो चार होते आये हैं।

दरअसल, सड़कों के आसपास की नालियों की सफाई न हो पाने की वजह से पानी सड़कों पर से बहता है, जिसके कारण सड़कों पर धूल और रेत के कण रह जाते हैं। मौसम के साफ होने के साथ ही ये रेत और धूल के कण वाहनों के पहियों और घर्षण के कारण हवा में उड़ते हैं और पीछे आने वाले दो पहिया वाहन चालकों और राहगीरों के लिये परेशानी का सबब बन जाते हैं।

बारिश के दौरान मौसम खुलने और बारिश के उपरांत वैसे भी संक्रमण की उम्मीद ज्यादा ही रहती है। इस लिहाज़ से सिवनी में आँखों के रोगियों की तादाद में बढ़ौत्तरी हो रही हो तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिये। हालात देखकर यही कहा जा सकता है कि नगर पालिका को नागरिकों की दुश्वारियों से ज्यादा सरोकार नहीं है।

दिल्ली, मुंबई आदि महानगरों में इस तरह की परेशानी से वाहन चालक इसलिये भी दो चार नहीं होते क्योंकि वहाँ दो पहिया पर चलने वाले लोग अव्वल तो हेल्मेट लगाये होते हैं और दूसरा यह कि नगर निगमों के द्वारा सड़कों की सफाई के लिये विशेष तरह की मशीन का प्रयोग किया जाता है।

सिवनी में यह समस्या सबसे ज्यादा नागपुर नाके से ज्यारत नाके तक की मॉडल रोड पर दिखायी देती है। इसका कारण यह है कि यहाँ बने डिवाईडर के आसपास धूल, मिट्टी और रेत बड़ी मात्रा में एकत्र हो जाती है। वाहनों की आवाजाही से ये कण हवा में तैरते हैं और लोगों के लिये परेशानी का सबब बनते नज़र आते हैं।

सिवनी में मॉडल रोड की सफाई के लिये नगर पालिका अगर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्रधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों से संपर्क करें तो इस मुश्किल को मिनिटों में हल किया जा सकता है। एनएचएआई के पास डिवाईडर साफ करने के लिये विशेष वाहन की व्यवस्था होती है।

इस वाहन के सामने और पीछे की ओर गोल आकार में अनेक झाड़ुओं को बांधा जाता है। इसके बाद यह झाड़ू गोल-गोल घूमकर डिवाईडर के पास चिपकी रेत, मिट्टी और अन्य कचरे को निकालकर सड़क पर लाती है, जिसे बाद में पीछे चल रहे कर्मचारियों के द्वारा उठा लिया जाता है। यह अलहदा बात है कि सिवनी जिले में अब तक इस मशीन का प्रयोग कभी होते नहीं देखा गया है।

वैसे निर्माण और खरीदी में ज्यादा दिलचस्पी लेने वाली भाजपा शासित नगर पालिका इस मशीन को खरीदने का ताना बाना बुनने लगे तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिये। इसकी खरीदी क्यों की जायेगी यह बात भी किसी से छुपी नहीं है। गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ करना मानो पालिका का पहला शगल बनकर रह गया है।

संवेदनशील जिलाधिकारी प्रवीण सिंह से जनापेक्षा है कि वे ही कम से कम स्वसंज्ञान से पालिका को इसके लिये पाबंद करें ताकि लोगों को हो रही परेशानियों से निज़ात मिल सके।