16 करोड़ के बैंक गारंटी घोटाले में प्रबंधक दोषी

 

 

 

 

दोषी बैंक मैनेजर सहित चार लोगों को 4 साल कैद

(ब्‍यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। राजधानी की सीबीआई विशेष अदालत ने सोलह करोड़ 57 लाख रुपए की बैंक गारंटी घोटाले के दोषी पाए गए बैंक मैनेजर, बैंक अधिकारी और अनाज की खरीदार फर्मों के संचालकों को 4 साल कैद और 16 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला शनिवार को विशेष न्यायाधीश आलोक अवस्थी ने सुनाया।

अभियोजन के अनुसार मामला वर्ष 2002 से 2003 के बीच एमपी नगर की देना बैंक शाखा का है। बैंक के रीजनल मैनेजर एस. श्रीनिवासन ने सीबीआई कार्यालय में लिखित शिकायत की थी। शिकायत में कहा गया था कि बैंक के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर आरके माथुर, बैंक अधिकारी संजय कुमार ने आरके एक्सपोर्ट भोपाल संचालक हेनरी गर्ग, गारंटर आरके गर्ग और सिंघल एक्सपोर्ट मुंबई के पार्टनर अशोक अग्रवाल के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपए की बैंक गारंटी प्राप्त की है।

बैंक मैनेजर और बैंक अधिकारी ने बैंक के नियमों को ताक पर रखते हुए ऐसी कुल 18 बैंक गारंटी स्वीकृत की जो कि 16 करोड़ 57 लाख रुपए की हैं। आरोपितों ने फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर चंडीगढ़ फूड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया से चावल की खरीदी की है। बैंक अधिकारियों ने आरोपितों को लाभ पहुंचाने के लिए उनकी लिमिट से अधिक की बैंक गारंटी स्वीकृत की थी। आरोपितों को 2 करोड़ 10 लाख रुपए तक बैंक गारंटी की पात्रता थी, लेकिन उन्हें 16 करोड़ 57 लाख रुपए की गारंटी दी गई।

आरोपितों ने इन फर्जी गारंटी के माध्यम से फिरोजपुर, जालंधर, चंडीगढ़, पटियाला व अन्य राज्यों की एफसीआई कार्यालयों से करोड़ों के अनाज की खरीदी की। आरोपितों ने एफसीआई को भी लाखों रुपए का चूना लगाया था, जिनके वसूली के प्रकरणों की सुनवाई अलग से अदालतों में चल रही है। सीबीआई ने शिकायत के आधार पर षडयंत्र में शामिल बैंक अधिकारियों और फर्मों के संचालकों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जीवाड़े और षडयंत्र का अपराध कायम कर मामले का चालान अदालत में पेश किया था।