कैसे रूकें फोरलेन पर हादसे!

 

 

(शरद खरे)

सिवनी से होकर गुजरने वाले चतुष्गामी पथ (फोरलेन) पर हादसों का सिलसिला रूकने का नाम नहीं ले रहा है। यह जबसे बनकर तैयार हुई है तबसे इस पर जब चाहे तब दुर्घटनाएं घट रही हैं। हाल ही में छपारा से गणेशगंज के बीच बनाये गये फोरलेन मार्ग पर हादसों की खासी तादाद देखकर यही प्रतीत हो रहा है कि या तो इस मार्ग के निर्माण के दौरान तकनीकि पहलुओं पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया है और या फिर ठेकेदार कंपनी के द्वारा इसके निर्माण में कोताही बरती गयी है।

पिछले दिनों हादसों को देखते हुए संवेदनशील जिला पुलिस अधीक्षक कुमार प्रतीक के निर्देश पर फोरलेन पर ब्लेक स्पॉट चिन्हित किये जाकर वहाँ गति अवरोधक बनाये जाने की कवायद की गयी। इस कवायद का स्वागत किया जाना चाहिये पर देखा जाये तो यह कार्य भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्रधिकरण का है। एनएचएआई के अधिकारियों के द्वारा अब तक यह काम क्यों नही किया गया! इस बात के लिये उनकी जवाबदेही भी तय की जाना चाहिये।

हाल ही में घुनई घाट में दुर्घटनाएं घटीं, इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और एनएचएआई के अधिकारियों को तलब किया गया। एनएचएआई का परियोजना निदेशक का कार्यालय सिवनी में उस समय अस्तित्व में आया था जब सिवनी में फोरलेन का काम आरंभ हुआ था। कालांतर में इस कार्यालय को नरसिंहपुर स्थानांतरित कर दिया गया था। वर्तमान में छिंदवाड़ा स्थित परियोजना निदेशक के कार्यालय के द्वारा सिवनी जिले के फोरलेन की निगरानी की जा रही है।

सिवनी में पिछले दिनों एक हजार करोड़ से ज्यादा की लागत से फोरलेन का निर्माण कराया जा रहा था। इसके बाद भी तत्कालीन संसद सदस्यों के द्वारा परियोजना निदेशक के कार्यालय को सिवनी वापस लाये जाने के मार्ग प्रशस्त नहीं किये गये। फिलहाल मोहगाँव से खवासा के बीच लगभग 730 करोड़ रूपये की लागत से फोरलेन का निर्माण कार्य प्रगतिशील है। इस काम के अधीक्षण (सुपरविजन) के लिये सिवनी में एनएचएआई के परियोजना निदेशक का कार्यालय अगर वापस बुलाया जाता है तो कम से कम इस काम का अधीक्षण सरलता से किया जा सकेगा, क्योंकि बार-बार छिंदवाड़ा से सिवनी आकर इसका निरीक्षण करना शायद संभव नहीं है।

सिवनी में फोरलेन पर हादसों के घटने का कारण क्या है, इसके लिये जिला प्रशासन सहित जन प्रतिनिधियों को केंद्र सरकार के भूतल परिवहन मंत्री और एनएचएआई के अध्यक्ष को पत्र लिखकर कम से कम पाँच परियोजना निदेशक सहित अन्य तकनीकि विभागों के उच्चाधिकारियों की एक जाँच समिति बनाकर इसकी जाँच करवायी जाना चाहिये।

मोहगाँव से सिवनी होकर लखनादौन और नरंिसंहपुर तथा जबलपुर के बीच सड़क का निर्माण, रख रखाव, मोड़ों पर सड़क का झुकाव, आपात स्थिति में एंबुलेंस, क्रेन आदि के पहुँचने का काम, हाईवे पेट्रोलिंग आदि की स्थिति का आंकलन किया जाकर इसमें अगर कमी पायी जाती है तो इसके लिये दोषी अधिकारियों या ठेकेदार के खिलाफ कठोर कार्यवाही की अनुशंसा की जाना चाहिये। संवेदनशील जिलाधिकारी प्रवीण सिंह से जनापेक्षा है कि वे ही इस मामले में एनएचएआई के अध्यक्ष से पत्राचार अवश्य करें ताकि सड़क पर हो रहे हादसों पर अंकुश लगाया जा सके।