सूर्यदेव 18 को जायेंगे तुला राशि में

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। नवग्रह के राजा सूर्य नारायण 18 अक्टूबर को तुला राशि में गमन करने वाले हैं।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ज्योतिष में सूर्य देव को नवग्रहों का राजा माना जाता है जिसे आत्मा का कारक माना गया है। सूर्य को सनातनधर्मी आदि पंच देवों में से एक मानते हैं। साथ ही वे इसे कलयुग में एकमात्र दृश्य देव के रूप में भी पूजते हैं। सूर्य का रत्न माणिक्य है।

ज्योतिषाचार्यों की मानें तो कुण्डली में मौजूद सभी 12 राशियों में से केवल एक राशि सिंह का स्वामित्व सूर्य देव को प्राप्त है। इसके साथ ही सूर्य देव कृतिका, उत्तरा फाल्गुनी उत्तराषाढ़ा नक्षत्रों के स्वामी हैं।

राशि परिवर्तन : सूर्य गोचर का समय : ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक पिछले दिनों हुए कई ग्रहों के राशि परिवर्तन के बाद एक बार फिर सूर्य देव अब 18 अक्टूबर को 0041 बजे कन्या से तुला राशि में गोचर करेंगे। वे रविवार 17 नवंबर को 0030 बजे तक इसी राशि में स्थित रहेंगे। सूर्य के इस राशि परिवर्तन का प्रभाव सभी राशियों पर होगा।

अक्टूबर में अभी ये परिवर्तन भी होंगे : सूर्य के इस राशि परिवर्तन के अलावा अक्टूबर 2019 में बुध और शुक्र भी गोचर करेंगे। इसके तहत : 23 अक्टूबर को बुध का वृश्चिक राशि में गोचर होगा। जबकि 28 अक्टूबर को शुक्र का भी वृश्चिक राशि में गोचर होगा। वहीं नवंबर के पहले सप्ताह में यानि 05 नवंबर को बृहस्पति का धनु राशि में गोचर होगा।

सूर्य का ज्योतिष में इतना महत्वपूर्ण स्थान क्यों : ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सनातन धर्म जिसे अब हिंदू धर्म के नाम से भी जाना जाता है, इसमें आस्था रखने वाले लोग एक देवता के रुप में सूर्य की उपासना करते हैं। यदि प्रतिदिन सूर्याेदय के समय सूर्य देव को जल चढ़ाया जाये तो जन्म कुण्डली में मौजूद सूर्य संबंधित दोषों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही सूर्य की उपासना करने से शारीरिक तेज और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। इसके साथ ही वैदिक ज्योतिष में सूर्य को आत्मा, पूर्वज, पिता और सरकारी सेवा का कारक माना गया है।

ऐसे समझें कुण्डली पर सूर्य का प्रभाव : ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यदि आपकी कुण्डली में सूर्य अच्छी स्थिति में विराजमान है, तो इसका अर्थ है कि जीवन में आपको मनवांछित फलों की प्राप्ति होती है। सूर्य की अच्छी स्थिति आपको अच्छे कामों को करने की तरफ प्रेरित करती है। ऐसे जातकों को खुद पर पूरा नियंत्रण होता है। इसके साथ ही ये भी माना जाता है कि यदि किसी जातक की कुण्डली में सूर्य बली है तो उसके मन में सकारात्मक विचार आते हैं और जीवन के प्रति उसका नज़रिया सकारात्मक होता है।

लेकिन वहीं यदि किसी कुण्डली में सूर्य की स्थिति अच्छी न हो तो इसके बुरे प्रभाव आपको परेशान कर सकते हैं। यहाँ तक की यह अपयश का कारण भी बन सकता है।