अवैध रूप से संचालित हो रही पासपोर्ट एजेंसी

 

 

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। लोगों को अब अहसास हो चला है कि जिसे भी नियमों को बलाए ताक पर रखकर काम करना हो उसके लिये सिवनी जिले से मुफीद और कोई जिला नहीं हो सकता है। अनेक मामलों में मीडिया के द्वारा यह बात उछाली जाने के बाद भी जिले में अवैध रूप से काम करने वालों की पौ बारह होने से अब नागरिक पस्त ही नज़र आ रहे हैं।

केंद्र सरकार के द्वारा भले ही गला फाड़ – फाड़ कर यह कहा जाता रहा हो कि पासपोर्ट बनवाने के लिये अधिकृत एजेंट्स के पास ही जायें या समीप के पोस्ट ऑफिस से फार्म लेकर बनवायें। पासपोर्ट में आने वाली दिक्कतों के चलते आम नागरिक गैर पंजीकृत पासपोर्ट एजेंट्स के पास जाकर पासपोर्ट बनवाने पर मजबूर हैं।

बताया जाता है कि पासपोर्ट बनवाने की लंबी और थकाऊ प्रक्रिया से बचने के लिये लोग शॉर्ट कट अपनाना पसंद करते हैं। बड़े शहरों में तो अनेक गैर पंजीकृत पासपोर्ट और वीजा बनवाने वालों के द्वारा इस काम को न केवल अंजाम दिया जा रहा है वरन सिवनी जैसे छोटे शहरों में भी गैर कानूनी तरीके से अपनी फ्रेंचाईजी बांट रखी गयी हैं।

कोतवाली पुलिस के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि कोतवाली में सिवनी शहर या जिले में एक भी अधिकृत पासपोर्ट या वीजा एजेंट की जानकारी दर्ज नहीं है। सूत्रों का कहना है कि वैसे यह सभी की जानकारी में है कि आधा दर्जन से ज्यादा लोग इस काम को अंजाम दे रहे हैं। वे इस काम को कैसे कर रहे हैं यह तो वे ही जानें किन्तु सूत्रों का दावा है कि इनमें से एक भी एजेंट के पास वैधता के कागजात नहीं होंगे।

सूत्रों का कहना है कि पासपोर्ट की दरकार वाले व्यक्ति को अपने वाकजाल में ये एजेंट्स बुरी तरह फांस लेते हैं, फिर फोन पर ही भोपाल में बैठे अपने आकाओं के माध्यम से तारीख आदि सुनिश्चित करवाकर सारे दस्तावेज लेकर उसी व्यक्ति से पैसे लेकर ये भोपाल की यात्रा कर पासपोर्ट बनवाने के काम को अंजाम देते हैं।

सूत्रों ने कहा कि पासपोर्ट जैसा काम बेहद संवेदनशील है। यह देश विदेश में भारत गणराज्य की पहचान का प्रतीक है, अतः इसे बनवाने के दौरान बेहद सावधानी बरतना आवश्यक होता है। विडंबना यह है कि न तो कोतवाली पुलिस और न ही अन्य किसी पुलिस या जिला प्रशासन के अधिकारी कर्मचारी को इस बात की फुर्सत है कि वे इस तरह के फर्जी तरीके से पासपोर्ट बनवाने वाले एजेंट्स की गिरेबां में हाथ डालें।