शरद पूर्णिमा पर बन रहा ये दुर्लभ योग

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। इस साल 13 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा पर 30 साल बाद गजकेसरी का दुर्लभ योग बन रहा है। यह शुभ योग चंद्रमा और मंगल के आपस में दृष्टि संबंध होने से बन रहा है, जिसे महालक्ष्मी योग भी कहा जाता है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अश्विन माह की इस पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहते हैं। माना जाता है कि इस तिथि पर देवी लक्ष्मी पृथ्वी का भ्रमण करती हैं और जो जाग कर देवी की पूजा करता है उस पर माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इस शरद पूर्णिमा पर स्वास्थ्य के साथ आर्थिक स्थिति में भी सुधार होने के योग बन रहे हैं।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पूर्णा तिथि और महालक्ष्मी योग बनने से शरद पूर्णिमा पर खरीददारी और नये काम आरंभ करना शुभ रहेगा। इस शुभ संयोग में प्रॉपर्टी, निवेश और महत्वपूर्ण लेन-देन करने से धन लाभ होने की संभावना और बढ़ जायेगी। नौकरी और व्यापार करने वाले लोगों के लिये पूरा दिन फायदेमंद रहेगा। इसके साथ ही सेविंग भी बढ़ेगी। इस दिन पद ग्रहण करना या नया दायित्व लेना भी शुभ है। इस दिन किये गये काम लंबे समय तक फायदा देने वाले रहेंगे। इस रात में ग्रहण की गयी औषधि बहुत जल्दी लाभ पहुँचाती है।

ज्योतिषाचार्यों ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर चंद्र की किरणें भी हमें लाभ पहुँचाती हैं। इसलिये इस रात में कुछ देर चाँद की चाँदनी में बैठना चाहिये। ऐसा करने पर मन को शांति मिलती है। तनाव दूर होता है। शरद पूर्णिमा की रात घर के बाहर दीपक जलाना चाहिये। इससे घर में सकारात्मकता बढ़ती है। शरद पूर्णिमा की चाँद को खुली आँखों से देखना चाहिये, क्योंकि इससे आँखों की समस्या नहीं होती। पूरे दिन व्रत रखें और पूर्णिमा की रात्रि में जागरण करें। व्रत करने वाले को चन्द्र को अर्घ्य देने के बाद ही अन्न ग्रहण करना चाहिये।

ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति : ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस साल शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा मीन राशि और मंगल कन्या राशि में रहेगा। इस तरह दोनों ग्रह आमने – सामने रहेंगे। वहीं मंगल, हस्त नक्षत्र में रहेगा जोकि चंद्रमा के स्वामित्व वाला नक्षत्र है। इससे पहले ग्रहों की ऐसी स्थिति 14 अक्टूबर 1989 में बनी थी। हालांकि 06 अक्टूबर 2006 और 20 अक्टूबर 2002 में भी चंद्रमा और मंगल का दृष्टि संबंध बना था, लेकिन मंगल, चंद्रमा के नक्षत्र में नहीं था। इनके अलावा चंद्रमा पर बृहस्पति की दृष्टि भी पड़ने से गजकेसरी नाम का एक और शुभ योग भी बन रहा है।