लोकतंत्र प्रहरियों व सैनानियों का सम्मेलन संपन्न

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। गांधी ने जिस तरह लंबे संघर्ष के बाद देश को आज़ादी दिलायी उसी तरह लोकनायक जय प्रकाश ने अपने विभिन्न जन आंदोलन के माध्यम से देश में एक नयी क्रांति वह भी शांतिपूर्ण के माध्यम से सत्ता परिवर्तन कर देश के लोगों को दूसरी आज़ादी दिलायी है।

उक्ताशय के विचार अग्रोहा लॉन में आयोजित हुए तीन जिलों के लोकतंत्र सेनानियों और प्रहरियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए उक्त संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य कैलाश सोनी के द्वारा व्यक्त किये गये। उन्होंने कहा कि आज जब हम उनकी जयंति पर उनका स्मरण कर रहे हैं तो यह आवश्यक है कि हम उनके संकल्पों और आदर्शों का अनुसरण करते हुए इसे अपने तक ही सीमित न रखें बल्कि अपनी युवा होती पीढ़ी को सौंपकर जायें।

उन्होंने कहा कि लोकनायक जय प्रकाश की क्रांति देश में सिर्फ सत्ता परिवर्तन अकेले के लिये नहीं थी बल्कि उन मूल्यों को स्थापित करने के लिये भी थी जिसका सपना महात्मा गांधी ने देखा था। एक अवसर आया था जब देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को इस बात का एहसास हुआ कि अब वे ज्यादा दिन के नहीं हैं तो उन्होंने अगले प्रधानमंत्री के रूप में जय प्रकाश नारायण के समक्ष इस पद को सम्हालने का प्रस्ताव रखा था किन्तु लोकनायक ने बड़ी ही विनम्रता से उनके इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।

श्री सोनी ने कहा कि उन्हीं जवाहर लाल नेहरू के जाने के बाद जब लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बने और इंदिरा गांधी सत्ता में आयीं तो उन्होेंने न केवल गांधी बल्कि प्रजातंत्र की सारी मान्यताओं को ही एक कोने में रख दिया और सत्ता के लिये पूरे देश में 19 महीने का आपातकाल लगाकर समूचे विपक्ष को रातों रात जेलों में डाल दिया।

उन्होंने कहा कि यह सिर्फ उन्होंने लोकनायक की जन क्रांति से घबराकर ही किया था। आज जब हम यहाँ बैठकर लोकनायक जय प्रकाश नारायण की जयंति मना रहे हैं तो हम सभी का दायित्व है कि हम उनके आदर्शों और सिद्धांतों को अपने आचरण तक नहीं बल्कि अपनी युवा होती पीढी और अपने पड़ौसियों तक को सौंपंे ताकि उनके विचार लंबे समय तक हमारे बाद भी आने वाली पीढियों को मिलते रहें।

कार्यक्रम में छिंदवाड़ा से आये लोकतंत्र सेनानी ईश्वरी चौरसिया के द्वारा अपने संबोधन में लोकनायक द्वारा स्वतंत्र भारत में की गयी जनक्रांति के दो मूल उद्देश्यों का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा गया कि यह सिर्फ लोकनायक ही नहीं बल्कि स्वयं महात्मा गांधी भी ऐसा ही चाहते थे।

उन्होंने कहा कि लोकनायक जय प्रकाश का कहना था कि देश की जो चुनाव प्रणाली है वह बदली जानी चाहिये। आज हमारे यहाँ लोकसभा और विधानसभा में केवल वे ही लोग चुनकर पहुँचते हैं जो पैसे वाले होते हैं जबकि लोकनायक का मानना था कि चुनाव लड़ने काअधिकार गरीब से गरीब व्यक्ति को होना चाहिये।

उन्होंने कहा कि इसी तरह उनका एक और लक्ष्य था कि जनता के द्वारा चुने गये जन प्रतिनिधि अगर उसकी अपेक्षा में खरे नहीं उतर रहे हैं तो जनता को बहुमत के साथ उसे वापस बुलाने का अधिकार मिलना चाहिये जो अभी जनता के पास नहीं है। यह व्यवस्था सिर्फ ग्राम पंचायत और नगर पालिका तक ही सीमित है जबकि वह लोकसभा और विधान सभा के लिये भी लागू होना चाहिये।

श्री चौरसिया ने कहा कि हम सभी लोकतंत्र के सजग प्रहरी हैं, अपने जीवन के महत्वूर्ण दिन हमने 19 माह जेल में गुजारे हैं। हमारा दायित्व है कि हम लोकनायक की उन दो अपेक्षाओं को पूरा करने की दिशा में अपने कदम बढ़ायें और इस लक्ष्य को प्राप्त करके ही हम न केवल महात्मा गांधी बल्कि लोकनायक जय प्रकाश नारायण के सपनों को पूरा कर सकेेंगे।

कार्यक्रम के प्रारंभ में सभी आमंत्रितों और लोकतंत्र सेनानियों द्वारा न केवल लोकनायक के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित की गयी। इसके पश्चात मंचासीन अतिथियों का स्वागत भी किया गया। इस अवसर पर लोकतंत्र सेनानी के परिजन भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम का संचालन राजेश उपाध्याय के द्वारा किया गया जबकि आभार प्रदर्शन जिला लोेकतंत्र सेनानी सिवनी के अध्यक्ष सुदर्शन बाझल के द्वारा किया गया। कार्यक्रम समापन के पूर्व जिले के वरिष्ठ लोकतंत्र सेनानी स्व.देवी सिंह ठाकुर अन्य दिवंगत हो चुके लोकतंत्र सेनानियों को मौन श्रद्धांजलि अर्पित की गयी।