दीपावली जैसे बड़े त्यौहार के ऐन पहले परीक्षाओं का क्या औचित्य!

 

इस स्तंभ के माध्यम से मैं विभिन्न शालाओं के प्रबंधन का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराना चाहता हूँ कि इन दिनों दीपावली जैसा प्रमुख त्यौहार समीप है लेकिन कई शालाओं में परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं जिससे विद्यार्थियों के साथ ही साथ अभिभावक भी परेशान हैं।

नवरात्रि समाप्त होते ही लोग दीपावली पर्व को धूमधाम से मनाने की तैयारी में जुट जाते हैं। इस त्यौहार का लोग साल भर काफी बेसब्री के साथ इंतजार करते हैं और दीपावली के पूर्व घरों मेें साफ सफाई का दौर चलाया जाता है जो कई-कई दिनों तक जारी रहता है। भले ही मजदूरों को इस काम में लगाया जाये लेकिन इस साफ सफाई में घर के सभी सदस्य भी मिलकर सभी कुछ व्यवस्थित तरीके से निपटाने का प्रयास करते हैं।

साफ सफाई का यह दौर एक दिन में ही पूर्ण होना संभव नहीं होता है क्योंकि इस दौरान घरों की आवश्यक मरम्मत न भी की जा रही हो तो रंग रोगन इत्यादि किया जाता है और यदि रंग रोगन नहीं भी किया जा रहा हो तो घरों के सामान आदि को एक स्थान से उठाकर दूसरे स्थान पर रखा जाता है, बाद में उसी सामान को साफ सुथरा करके पुनः व्यवस्थित तरीके से जमाया जाता है जिसके लिये वक्त चाहिये होता है।

ऐसे कार्यों में घर के सभी सदस्यों का सहयोग आवश्यक हो जाता है लेकिन वर्तमान में परीक्षाएं आयोजित करने से इन कार्यों में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। न तो साफ सफाई तरीके से हो पा रही है और न ही विद्यार्थी एकाग्रचित होकर पढ़ायी में ही जुट पा रहे हैं, ऐसे में इन दिनों में परीक्षाएं आयोजित करने का कोई तुक समझ में नहीं आता है। इन परीक्षाओं को दीपावली जैसे प्रमुख पर्व के उपरांत भी आयोजित किया जा सकता था जो नहीं किया गया है।

बहरहाल शाला प्रबंधन का निर्णय है इसलिये विद्यार्थी, इन परीक्षाओं में अपनी तरफ से बेहतर प्रदर्शन करने के लिये जुटे हुए तो नज़र आ रहे हैं लेकिन इस तरह की बाधित तैयारियों के बीच परीक्षा देने के कारण इन परीक्षाओं के परिणाम यदि विद्यार्थियों की अपेक्षा के अनुरूप नही आये तो इससे उन विद्यार्थियों के अंदर हताशा भी घर कर सकती है। उम्मीद है शाला प्रबंधन आगे से समझदारी दिखायेंगे और प्रमुख त्यौहारों के ऐन पहले इस तरह की परीक्षाओं को आयोजित करने से बाज आयेंगे।

आशीष भटनागर