गौ, गीता, गंगा महामंच ने मनायी बाल्मीकि जयंति

 

राम नाम जपकर बाल्मीकि ने रचा विश्व का पहला महाकाव्य : पाण्डेय

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। गौ, गीता, गंगा महामंच की ओर से संस्कृत के आदि कवि महर्षि बाल्मीकि की जयंति मनायी गयी।

इस अवसर पर लक्ष्मी नारायण मंदिर के पुजारी पं.हेमंत त्रिवेदी मुख्य अतिथि के बतौर उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रुप मे समाज सेवी गौ, गीता, गंगा महामंच के अध्यक्ष पं.रविकान्त पाण्डेय ने अपने वक्तव्य में कहा कि ज्ञान एवं कर्म के दम पर मानव महान बनता है। इसका जीता जागता उदाहरण डाकू रत्नाकर से महर्षि बने बाल्मीकि हैं।

गौ, गीता, गंगा महामंच द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम मे सर्वप्रथम वैदिक विधि विधान से विद्वत परिषद के आचार्य गणों द्वारा महर्षि का पूजन किया गया। इसके उपरांत महामंच के अध्यक्ष ने उपस्थित गणमान्यों का स्वागत कर अपने उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि मानव कल्याण के लिये महर्षियों का जीवन अनुकरणीय है। महर्षि ने संस्कृत में ऐतिहासिक ग्रंथ रामायण की रचना की जो आदि काव्य ग्रंथ है।

उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम को मर्यादा पुरुष के रुप में भारत के घर-घर में पहुँचाने का सर्वप्रथम कार्य महर्षि बाल्मीकि ने ही किया है। डाकू रत्नाकर को महर्षि नारद ने जब सत्य के ज्ञान से परिचित करवाया तो उन्हें राम-नाम के जप का उपदेश भी दिया था, परंतु वह राम-नाम का उच्चारण नहीं कर पाते तब महर्षि नारद ने विचार करके उनसे मरा-मरा जपने के लिये कहा और मरा रटते – रटते यही राम हो गया और निरन्तर जप करते – करते हुए वह ऋषि बाल्मीकि बन गये।