आवारा श्वानों से हलाकान हैं मरीज़ों के परिजन!

 

 

ऑपरेशन कायाकल्प जारी : आवारा मवेशियों, कुत्तों का फैल रहा साम्राज्य!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। जिला अस्पताल में भले ही ऑपरेशन कायाकल्प जोर शोर से चल रहा हो, पर इसके साथ ही अस्पताल परिसर में आवारा मवेशी, गधे, श्वान आदि मरीज़ों के परिजनों के लिये परेशानी का सबब भी बनते जा रहे हैं। खुले में फेंके जाने वाले बायो मेडिकल वेस्ट को अपना आहार बनाकर आवारा श्वान अब हिंसक भी हो रहे हैं।

ज्ञातव्य है कि अस्सी के दशक के उत्तरार्द्ध (लगभग 31 साल पहले) में मेडिकल कॉलेज़ की अर्हता वाले जिले चिकित्सालय की सौगात पूर्व केंद्रीय मंत्री सुश्री विमला वर्मा के द्वारा सिवनी के निवासियों को दी गयी थी। इक्कीसवीं सदी के आगाज़ तक महाकौशल क्षेत्र में जबलपुर मेडिकल कॉलेज़ के बाद सिवनी के अस्पताल को ही संभाग में सबसे बेहतरीन अस्पताल की संज्ञा दी जाती रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला चिकित्सालय परिसर में आवारा मवेशियों की आमद रफत दिन भर जारी रहती है। इसके अलावा परिसर में आवारा श्वानों की तादाद भी देखते ही बनती है। कुछ दिनों पहले तक अस्पताल के कचराघर में खुले में बायो मेडिकल वेस्ट रखने के कारण मरीज़ों की महरम पट्टी, ऑपरेशन के दौरान निकलने वाले मानव अंगों को इन आवारा श्वानों के द्वारा अपना ग्रास बना लिया जाता था।

बताया जाता है कि अस्पताल में आवारा श्वान खूंखार भी हो रहे हैं। ये मरीज़ों के परिजनों पर झपटते भी नज़र आते हैं। दिन भर आवारा श्वानों की धमाचौकड़ी के कारण मरीज़ों के परिजन आतंकित नज़र आते हैं। इतना ही नहीं अस्पताल की साफ सफाई और सुरक्षा का काम आउट सोर्स किये जाने, अस्पताल में प्रवेश के महज़ तीन चार प्रवेश द्वार होने के बाद भी आवारा श्वान किस तरह वार्ड के सामने कॉरीडोर में प्रवेश कर जाते हैं यह बात भी शोध का ही विषय मानी जा सकती है।

लोगों ने बताया कि जब वे दो पहिया वाहन लेकर अस्पताल परिसर में प्रवेश करते हैं या बाहर निकलते हैं तो ये आवारा कुत्ते उन पर झपटते भी हैं, जिसके चलते लोगों का ध्यान बंटता है और वे गिरकर घायल भी हो जाते हैं। वहीं, शहर में भी आवारा श्वानों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है।

जिला अस्पताल में प्रवेश के लिये वर्तमान में महज़ दो ही द्वार बचे हैं। रोगी कल्याण समिति की दुकानों के समस्त प्रवेश द्वारों को प्रशासन के द्वारा बंद करवा दिया गया है। इसके बाद भी मवेशी और श्वान अस्पताल परिसर में प्रवेश कहाँ से कर पा रहे हैं यह बात भी शोध का ही विषय है।