ट्रामा सेंटर था सिवनी बायपास पर प्रस्तावित

 

 

0 सिवनी का ट्रामा केयर सेंटर . . .2

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। सिवनी में बायपास पर प्रस्तावित ट्रामा केयर सेंटर के न बनने के कारण हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं में घायलों को फौरी तौर पर मदद न मिल पाने से प्रतिकूल स्थितियां निर्मित हो रही हैं। सिवनी में दुर्घटना के नब्बे क्या निन्यानबे फीसदी मरीज़ों को जिला चिकित्सालय में पर्याप्त संसाधन न होने के कारण नागपुर रिफर कर दिया जाता है।

ज्ञातव्य है कि वर्ष 2008 के दिसंबर माह में सिवनी से गुजरने वाले फोरलेन के हिस्से पर ग्रहण के बादल छा गये थे। इसके बाद लगातार ही यह मामला दिल्ली में मंत्रालयों की सीढ़ियां चढ़ – उतर रहा था। इसके बाद 20 दिसंबर 2013 को भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के द्वारा मोहगाँव से खवासा एवं छपारा से गणेशगंज के बीच रूके हुए सड़क के निर्माण के कार्य को सशर्त अनुमति प्रदाय कर दी गयी थी।

बहरहाल, सिवनी शहर के फोरलेन बायपास पर ट्रामा केयर सेंटर का निर्माण प्रस्तावित था। एनएचएआई के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि एनएचएआई के टेक्निकल शेड्यूल के हिसाब से किलोमीटर 623/000 से 623/700 के मध्य एक रेस्ट हाउस का निर्माण करवाया जाना चाहिये था।

सूत्रों ने आगे बताया कि 612/300 से 612/700 के मध्य एक ट्रक ले बाय, 621/000, 623/100 एवं 650/400 में बस ले बाय, किलोमीटर 650/730 एवं 651/270 के मध्य इंटीग्रेटेड चैक पोस्ट एवं टोल प्लाज़ा का निर्माण करवाया जाना प्रस्तावित था। इसके साथ ही साथ सिवनी बायपास पर ट्रामा केयर सेंटर का निर्माण भी प्रस्तावित था।

एनएचएआई के सूत्रों ने आगे बताया कि एनएचएआई के द्वारा सिवनी बायपास पर ट्रामा केयर सेंटर के लिये शासन से जगह का आवंटन करवा लिया है, पर इसके निर्माण में एनएचएआई के अधिकारी पता नहीं क्यों रूचि नहीं दिखा रहे हैं।

सूत्रों ने कहा कि बीच में एनएचएआई के अधिकारियों के द्वारा शासन से अधिग्रहित जमीन के स्थान पर ट्रामा केयर सेंटर का निर्माण छिंदवाड़ा नाके पर बायपास के दोनों ओर उतरने वाली सड़क के मध्य जिसे एनएचएआई में बोलचाल की भाषा में जलेबी चौक कहा जाता है में करवाये जाने पर भी विचार किया जा रहा था।

सूत्रों ने कहा कि पता नहीं क्यों एनएचएआई के द्वारा अब तक ट्रामा केयर सेंटर के निर्माण में दिलचस्पी नहीं ली जा रही है। सूत्रों की मानें तो सिवनी का काम देख रहे अधिकारी कर्मचारियों को इस बात की कतई परवाह नहीं दिख रही है कि सिवनी जिले में विशेषकर फोरलेन पर होने वाली दुर्घटनाओं में हताहतों की तादाद बढ़ने के बाद उन्हें किसी तरह की पर्याप्त मेडिकल एड नहीं मिल पा रही है।

सूत्रों ने यह भी बताया कि नरसिंहपुर से सिवनी तक के एमपी टू हिस्से के संधारण का काम मीनाक्षी कंपनी के हवाले है तो सिवनी से मोहगाँव तक के हिस्से का जिम्मा सदभाव कंपनी के हवाले। दोनों ही कंपनियों को अपने – अपने संधारण वाले हिस्से में हाईवे पेट्रोलिंग, एंबुलेंस, क्रेन आदि की व्यवस्थाएं करना चाहिये, किन्तु सड़कों पर ये वाहन दिखायी कम ही पड़ते हैं।