कुपोषित बच्चों से पैसे माँग रहे 108 के चालक!

 

 

पैसे नहीं देने पर अस्पताल में करवा रहे घण्टों इंतजार!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। एक तरफ जिलाधिकारी प्रवीण सिंह के द्वारा जिले के कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य की चिंता की जाकर अनेक अभियानों के तहत इनकी सेहत में सुधार के प्रयास किये जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण अंचलों से कुपोषित बच्चों को जिला चिकित्सालय लाने और ले जाने के लिये पाबंद 108 एंबुलेंस के कर्मचारियों के द्वारा कुपोषित बच्चों के परिजनों से पैसों की माँग की जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अरी के साल्हेखुर्द निवासी नेमीचंद ठाकरे का दो वर्ष दस माह का बालक प्रदीप एवं मुकेश के दो जुड़वा बच्चे राशि और रूचि जिनकी आयु दो वर्ष एक माह है, की सेहत ठीक नहीं थी। आँगनबाड़ी कार्यकर्त्ता गीता कटरे के द्वारा इन बच्चों के प्राथमिक परीक्षण में इन्हें कुपोषित पाये जाने पर इनका परीक्षण और उपचार के लिये उद्देश्य से अस्पताल ले जाया गया।

बताया जाता है कि मंगलवार को लगभग एक बजे 108 एंबुलेंस से इन बच्चों को जिला अस्पताल लाया गया। पीड़ितों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि 108 एंबुलेंस से इन बच्चों को लेकर उनके परिजन सिवनी आ रहे थे तब एंबुलेंस में उपस्थित स्टॉफ के द्वारा इनसे बीस-बीस रूपये की माँग की गयी।

जिला अस्पताल के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि जिला अस्पताल में परीक्षण और उपचार के उपरांत जब इन्हें वापस घर भेजने की बारी आयी तो 108 एंबुलेंस क्रमाँक एमपी 34 बीए 0492 के चालक नंद किशोर जंघेला के द्वारा इनसे सौ-सौ रूपयों की माँग की गयी।

पीड़ितों ने बताया कि अस्पताल लाये जाते समय एक महिला कर्मचारी के द्वारा इनसे बीस रूपये प्रति सवारी की माँग की गयी और जब वापस जाने की बारी आयी तो इनसे सौ रूपये की माँग की गयी। इनके द्वारा जब यह कहा गया कि वे गरीब हैं, पैसे नहीं दे सकते हैं तो एंबुलेंस चालक के द्वारा उनसे यह कह दिया गया कि वह इन्हें घण्टों इंतजार करवायेगा।

उन्होंने बताया कि इसके बाद वे लगभग ढाई तीन घण्टे इंतजार ही करते रहे पर उन्हें घर वापस जाने के लिये किसी तरह का कोई साधन नहीं मिला। बाद में आँगनबाड़ी कार्यकर्त्ता के द्वारा किये गये प्रयासों के बाद दूसरा वाहन आया और उसमें बच्चे, उनके परिजन और आँगनबाड़ी कार्यकर्त्ता अपने – अपने घर वापस लौट पाये।

अस्पताल के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को यह भी बताया कि जब से 108 एंबुलेंस की सेवाएं आरंभ हुई हैं उसके बाद से एंबुलेंस में चलने वाले कर्मचारियों के द्वारा मरीज़ों के परिजनों से पैसे माँगने की अनेक शिकायतें प्रकाश में आती रही हैं। अनेक लोग तो चुपचाप पैसे देकर शिकायत करने से भी बचते हैं, क्योंकि बाद में बयान देने आदि के चक्कर में वे पड़ना नहीं चाहते हैं।

यहाँ यह उल्लेखनीय होगा कि जिलाधिकारी प्रवीण सिंह के द्वारा हाल ही में कुपोषित बच्चों को चिन्हाकित किये जाने के बाद रक्त अल्पता वाले प्रकरणों में रक्त चढ़ाये जाने के लिये रक्तदान शिविर का आयोजन भी किया गया था। बावजूद इसके जानकारी के अभाव में एंबुलेंस के जरिये अस्पताल आने जाने वाले कुपोषित बच्चों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

संवेदनशील जिलाधिकारी प्रवीण सिंह से जनापेक्षा है कि कुपोषित बच्चों के उपचार के लिये उन्हें उनके ग्राम से जिला अस्पताल या नजदीकि अस्पताल आने जाने के लिये 108 एंबुलेंस की उपलब्धता निःशुल्क है इसका प्रचार – प्रसार ज्यादा से ज्यादा करवाने की व्यवस्था करवायी जाये ताकि कुपोषित बच्चों को भी इसका लाभ मिल सके।

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