पेंच की पहचान बनी सुपर मॉम

 

 

(शरद खरे)

देश के वन क्षेत्रों की फेहरिस्त में पेंच नेशनल पार्क अपना अहम स्थान रखता है। पिछले एक दशक से ज्यादा समय में पेंच नेशनल पार्क की खूबसूरती, वन्यजीवों की हलचल, पेंच पार्क प्रबंधन का अतिथि सत्कार आदि के बेहतरीन प्रदर्शन के बाद देश – विदेश के पर्यटकों की पहली पसंद के रूप में यह नेशनल पार्क बनता जा रहा है।

इस पार्क का कुल क्षेत्रफल 1179.632 वर्ग किलो मीटर है, इसमें कोर क्षेत्र 411.330 वर्ग किलो मीटर, (राष्ट्रीय उद्यान 292.857 वर्ग किलो मीटर, अभ्यारण्य 118.473 वर्ग किलो मीटर) के अलावा बफर क्षेत्र 768.302 वर्ग किलो मीटर शामिल है।

पेंच नेशनल पार्क का नामकरण भले ही बाद में किया गया हो पर इस स्थान का जिकर आईने अकबरी, के अलवा आर.ए. स्ट्रेन्डल की सिवनी, कैंप लाईफ इन द सतपुड़ा, फोर्सेथ की हाई लैण्डस ऑफ सेन्ट्रल इंडिया, डनबर ब्रेन्डर की वाईल्ड एनिमल्स ऑफ सेन्ट्रल इंडिया जैसी पुस्तकों में मिलता है।

पेंच नेशनल पार्क को सबसे ज्यादा लोकप्रियता घूमंतु ब्रितानी पत्रकार रूडयार्ड क्पिलिंग के सुप्रसिद्ध उपन्यास द जंगल बुक के हीरो मोगली एवं उसके साथियों के कारण मिली। इस पुस्तक पर बने कार्टून सीरियल को बच्चों के साथ ही साथ हर वर्ग के लोगों के द्वारा सराहा गया।

पेंच नेशनल पार्क को 1977 में पेंच अभ्यारण्य क्षेत्र के रूप में पहचान मिली। इसके बाद 1983 में यहाँ पेंच राष्ट्रीय उद्यान बनाया गया। वर्ष 1992 में पेंच को भारत सरकार के द्वारा 19वें राष्ट्रीय उद्यान के रूप में पहचान दी गयी। इसकी रंगत 1999 के बाद निखरना आरंभ हुई जो अब भी बदस्तूर जारी है।

वन्य जीवों के प्रति मनुष्य की दिलचस्पी सदियों से बनी रही है। आज के युग में दौड़ती भागती जिंदगी के बीच अगर कुछ पल वन्य जीवों, जंगल आदि के बीच बिताने को मिल जायें तो मनुष्य आल्हादित हुए बिना नहीं रहता है। पेंच नेशनल पार्क के वन्य जीव विशेषकर यहाँ के बाघ पर्यटकों के लिये आकर्षण का केंद्र रहते हैं।

कुछ साल पहले तक नाले वाली बाघिन पर्यटकों को लुभाती थी। उसके अवसान के बाद अब कॉलर वाली बाघिन (टी 15) पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुकी है। यह बाघिन अब तक 29 शावकों को जन्म दे चुकी है, जो अपने आप में रिकॉर्ड माना जा सकता है। नाले वाली बाघिन की तरह ही कॉलर वाली बाघिन भी पर्यटकों की जिप्सी के आसपास विचरण करने से गुरेज नहीं करती है। पेंच नेशनल पार्क के कर्मचारी इस बाघिन को देवी या सुपर मॉम भी कहते हैं क्योंकि यही बाघिन पर्यटकों को आकर्षित करती है, एवं पर्यटकों की आमद रफत से पेंच प्रबंधन को खासी आय भी होती है।

पेंच नेशनल पार्क में बाघों की तादाद बढ़ना शुभ संकेत है। व्यस्क बाघ अपना क्षेत्र निर्धारित करते हैं यह बात किसी से छुपी नहीं है। अगर यहाँ बाघों की तादाद बढ़ेगी तो इनमें वर्चस्व की जंग होना स्वाभाविक ही है। इसमें बाघों की असमय मौत भी हो जाती है। इसलिये पेंच नेशनल पार्क प्रबंधन को चाहिये कि समय रहते या तो पेंच नेशनल पार्क का रकबा बढ़ाने की दिशा में प्रयास किये जायें या फिर प्रदेश में जिन स्थानों पर बाघों की कमी हैं, उन स्थानों पर इन्हें भेजने की कवायद की जाये।

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