अंधेरे में डूबी सिवनी की ऐतिहासिक धरोहर बड़ा मिशन स्कूल!

 

इस स्तंभ के माध्यम से मैं मिशन स्कूल प्रबंधन के अलावा नगर पालिका एवं जिला प्रशासन का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराना चाहता हूँ कि सिवनी की ऐतिहासिक धरोहर के रूप में ख्याति अर्जित कर चुके बड़ा मिशन स्कूल की इमारत रात के समय पूरी तरह अंधेरे की भेंट चढ़ जाती है।

इस इमारत ही नहीं बल्कि संपूर्ण परिसर से उन लोगों की भावनाएं बहुत गहरे तक जुड़ी हुई हैं जो देश विदेश में या तो नाम कमा चुके हैं या इन दिनों कमा रहे हैं। वे जब सिवनी आकर इस ऐतिहासिक धरोहर के दर्शन करते हैं तब उन्हें इस बात का रंज होता है कि इसके रख रखाव की दिशा में ज्यादा गंभीरता के साथ ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

वर्षों पहले इस स्कूल की सीमा पर गांधी भवन से गणेश चौक वाले सिरे पर दुकानों का निर्माण करवा दिया गया। इन दुकानों के निर्माण के कारण मिशन स्कूल प्रबंधन को भले ही आर्थिक रूप से फायदा पहुँचा हो लेकिन इससे वहाँ बाज़ार का वातावरण निर्मित हो गया जो एक शिक्षण संस्थान को प्रभावित करने के लिये काफी माना जा सकता है। दुकानों के निर्माण के कारण मिशन स्कूल की गरिमा को कहीं न कहीं ठेस अवश्य पहुँची है।

इसके कारण उस महत्वपूर्ण क्षेत्र में बाज़ार का वातावरण निर्मित हो गया जिसने इस शाला के शिक्षा के स्तर को भी जमकर प्रभावित किया है। एक समय इस मिशन स्कूल की ख्याति दूर-दूर तक थी लेकिन अब इसमें वह बात नहीं रही। बावजूद इसके, इस शाला परिसर की भव्य इमारत आज भी इसके स्वर्णिम दिनों की याद दिलाते हैं। दुकानों के कारण इस शाला की भव्यता सामने से तो अब उतनी नहीं दिखायी देती है लेकिन आजू-बाजू से यह अपनी ओर आज भी आकर्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ती है।

रात के समय में इस इमारत के दर्शन सामने से तो क्या आजू-बाजू से भी नहीं किये जा सकते हैं, इसका कारण यही है कि यहाँ पर रौशनी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। संभव था कि यदि यही इमारत किसी अन्य जिले में स्थित होती तो इसकी भव्यता को और भी ज्यादा निखारने की दिशा में प्रयास अवश्य किये जाते। शाला प्रबंधन भले ही रूचि न दिखाये लेकिन नगर पालिका जैसी संस्थाएं इस परिसर को रौशनी से नहला देतीं और रात में भी यह भव्य इमारत सिवनी के गौरव को बयां करती नज़र आती।

इसी शाला में लगे घण्टे की ध्वनि दूर-दूर तक सुनी जाती है और लोग जब सिवनी आते हैं तब इमारत को निहारते समय उनकी नज़र, इमारत के ऊपर लगे घण्टे पर सहसा ठहर सी जाती है। इस शाला परिसर में खेल मैदानों की कमी भी नहीं है। संभवतः यही एक ऐसी शाला है जिसके पास, शहर के मध्य में स्थित होने के बावजूद खेल के लिये विशाल रकबा उपलब्ध है और इन मैदानों पर विभिन्न व्यवसायिक आयोजन भी होते हैं।

इस मिशन स्कूल के मैदान पर ऐसे व्यवसायिक आयोजनों को उचित कहा जा सकता है या नहीं, यह तो अलग बात है लेकिन इन मैदानों का उपयोग राते के अंधेरे में शराबी अवश्य करते हैं। इसलिये पुलिस प्रशासन को भी चाहिये कि उसके द्वारा यहाँ गंभीरता के साथ गश्ती अवश्य करवायी जाये। यदि प्रकाश की उचित व्यवस्था इस शाला परिसर के चारों तरफ हो जाती है तो इसकी सुंदरता में तो चार चाँद लगेंगे ही लगेंगे, साथ ही असामाजिक तत्व इस शाला परिसर का उपयोग रात के अंधेरे में नहीं कर सकेंगे।

मो.अय्यूब अली