पखवाड़ा भर बाद भी बोर्ड नहीं लगवा पाया पीआईयू

 

(ब्यूरो कार्यालय)

केवलारी (साई)। जिले में भ्रष्टाचार चरम पर है। हालात ये हैं कि अधिकारियों के निर्देशों की भी परवाह नहीं की जाती है। मामला केवलारी का है जहां के पीजी कॉलेज में तकरीबन दो करोड़ रुपए से अधिक की राशि से इमारत और बॉउंड्री वॉल का निर्माण किया जा रहा है।

यहां पर विभाग के अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद एक पखवाड़े बाद भी निर्माण स्थल पर अबतक किसी तरह का बोर्ड नहीं लगा है जिससे लोगों को जानकारी नहीं मिल पा रही है। इस बीच कॉलेज में निर्माण की जांच के लिए एसडीएम केवलारी ने भी जांच के लिए तीन सदस्यी समिति का निर्माण कर उससे एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट तलब की है।

कॉलेज की जन भागीदारी समिति के पूर्व अध्यक्ष रवि बघेल ने पीआईयू के तले बन रहे कॉलेज कमरों और बाउंड्री वॉल के निर्माण में गुणवत्ताहीन सामाग्री के प्रयोग का आरोप लगाया है। कॉलेज प्रशासक को दी अपनी शिकायत में श्री बघेल का कहना है कि कॉलेज के एक दर्जन कमरों और बाउंड्री वॉल के निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है।

ईंटों को जोड़ने के लिए जो मसाला प्रयुक्त किया जा रहा है वह भी गुणवत्ता हीन है। मसाले में सीमेंट और रेत का सही अनुपात नहीं लिया जा रहा है। इससे दीवार के अगली बारिश में ढह जाने की आशंका है। श्री बघेल का कहना है कि इस कॉलेज में सैकड़ों विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। किसी हादसे की दशा में काफी नुकसान हो सकता है। इसलिए निर्माण में मानकों का ध्यान रखा जाए।

कॉलेज में करोड़ों रुपए की लागत से हो रहे निर्माण कार्यों के संबंध में कहीं भी कोई बोर्ड नहीं लगा है। इस तरह के निर्माण कार्याे में निर्माण संबंधी जानकारी को बोर्ड लगा रहना अनिवार्य है, जिसमें निर्माण कार्य का नाम, प्रारंभ होने की तिथि, काम खत्म होने की संभावित तिथि, उसके विभिन्न चरण, निर्माण कार्य में लगने वाली लागत का जिक्र किया जाना चाहिए। इस कॉलेज में 12 कमरों का निर्माण किया जा रहा है। जिसकी लागत एक करोड़ 35 लाख रुपए है।

इसके साथ ही कॉलेज परिसर में बन रही बाउंड्री वॉल की लागत 89 लाख रुपए है जबकि इसका स्टीमेट 98 लाख रुपए का है। 27 सितंबर को इस मामले के पीआईयू के संज्ञान में लाए जाने पर पीयूष अग्रवाल, ईई, पीआईयू ने अगले ही दिन सूचना बोर्ड लगाए जाने का आदेश देने की बात कही थी लेकिन एक पखवाड़ा बाद भी सूचना बोर्ड नहीं लगा है। इससे आसानी से समझा जा सकता है कि ठेकेदार के लिए अधिकारियों के आदेश क्या मायने रखते हैं।

मैने ठेकेदार को उसी दिन बोर्ड लगाने के लिए कहा था. यदि बोर्ड नहीं लगा है तो यह आदेशों की अव्हेलना है. आदेशों की अव्हेलना पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. ऐसा नहीं होना चाहिए. बोर्ड शीघ्र लगाने के आदेश दिए जाएंगे.

पीयूष अग्रवाल,

कार्यपालन यंत्री,

पीआईयू.