शुद्ध घी से लेकर जलाऊ तेल में ऐसे हो रही मिलावट

 

 

(वाणिज्य ब्यूरो)

सिवनी (साई)। दीपावली नजदीक ही है और खाद्य विभाग भी चौकस होने का स्वांग रच रहा है, लेकिन हमेशा की तरह मिलावटखोर भी एक बार फिर अपनी कारस्तानी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। मिलावट का सिलसिला मिठाईयों में ही नहीं उन तेलों में भी जारी है जिन्हें हम खाने या जलाने के लिये इस्तेमाल करते हैं। इसी मिलावटखोरी के चलते व्यापारी करोड़ों का घालमेल कर जाते हैं।

त्यौहारों पर मिलावट खोरी आम बात हो गयी है। सोयाबीन तेल हो या घी। इन सबको शुद्ध एवं रिफाइण्ड के नाम से बेचा जा रहा है। प्रमुख क्षेत्रों में मिलावट वाला घी एवं खाद्य तेल धड़ल्ले से बिक रहा है। नकली तेल और घी से गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

तेल : मूंगफली और सोयाबीन के तेल में राइस ब्रेन ऑइल यानी धान के छिलकों से निकाला गया तेल मिलाया जाता है। सरसों के तेल में ज्यादातर पाम ऑइल मिलाया जाता है। इसमें तेजी लाने के लिये केमिकल तक का इस्तेमाल होता है।

शुद्धघी : शुद्ध घी 400 से 440 रूपये प्रति लीटर तो नकली घी 300 से 350 रूपये लीटर तक बिकता है। वनस्पति का इस्तेमाल उसे गाढ़ा करने के साथ मात्रा बढ़ाने के लिये किया जाता है। खुशबू के लिये एसेंस मिलाया जाता है। जिले में एक दर्जन से ज्यादा तेल के बड़े डीलर्स हैं। इसके अलावा दो सौ से ज्यादा फुटकर विक्रेता और आधा सैकड़ा से ज्यादा घी विक्रय केंद्र संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा जिले में हर रोज बड़ी तादाद में खोवे का उत्पादन भी हो रहा है।

दीपावली पर्व पर दीये रौशन करने के लिये बाज़ार में जलाऊ तेज की भरमार रहती है। यह मूलतः खराब तेल होता है। इसे रिफाइण्ड करके सस्ते दाम पर बेचा जाता है। इसे जलाने से प्रदूषण फैलता है।