आवारा साण्ड ने उठाकर पटका उदित कपूर को!

 

 

सिर में लगे तीन टांके, कलेक्टर के निर्देश दिख रहे बेअसर!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। शहर में आवारा मवेशियों, कुत्तों, सूअर, गधों आदि को हटाने में नाकाम रही नगर पालिका की अनदेखी का खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। शुक्रवार की शाम बाहुबली चौराहे पर एक आवारा साण्ड ने कपूर ट्रेडर्स एण्ड इंजीनियर्स के संचालक उदित कपूर को उठाकर पटक दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इंजीनियर उदित कपूर शाम लगभग साढ़े पाँच बजे बाहुबली चौराहे से अपने प्रतिष्ठान की ओर पैदल जा रहे थे। इसी बीच सड़क पर खड़े एक साण्ड ने उन्हें पीछे से हमला करते हुए उठाकर पटक दिया। उन्हें सिर पर चोट लगी है। उनके परिचितों के द्वारा, उन्हें तत्काल ही जठार अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनके सिर पर तीन टांके लगे।

इस घटना के बाद उक्त आवारा साण्ड रात लगभग ग्यारह बजे तक बाहुबली चौराहे पर ही मण्डराता रहा और इस दौरान उसके द्वारा अनेक लोगों को दौड़ाया भी गया। इस पूरे घटनाक्रम से बाहुबली चौराहा क्षेत्र में दहशत का माहौल पसर गया। क्षेत्र के व्यापारी बुरी तरह आतंकित भी नज़र आ रहे थे।

यहाँ यह उल्लेखनीय होगा कि 04 अक्टूबर को सांसद डॉ.ढाल सिंह बिसेन की अध्यक्षता में संपन्न हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में जिलाधिकारी प्रवीण सिंह के द्वारा नगर पालिका परिषद को सड़कों पर घूम रहे आवारा मवेशियों के खिलाफ कार्यवाही के निर्देश दिये गये थे।

बताया जाता है कि इस बैठक में नगर पालिका के अधिकारियों से कहा गया था कि दशहरा पर्व (08 अक्टूबर) के संपन्न होने के उपरांत आवारा मवेशियों को हटाये जाने की कार्यवाही प्राथमिकता के आधार पर करवायी जाये। विडंबना ही कही जायेगी कि जिला कलेक्टर के द्वारा दिये गये आदेशों के बाद शुक्रवार को हुई घटना, इस बात की द्योतक है कि जिलाधिकारी के निर्देशों को भाजपा शासित नगर पालिका परिषद किस रूप में ले रही है।

नगर पालिका के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि दरअसल, सालों से जिलाधिकारियों के द्वारा नगर पालिका को निर्देश तो दिये जाते रहे हैं किन्तु इन निर्देशों को अमली जामा पहनाया भी जा रहा है अथवा नहीं, इस बात की सुध नहीं लिये जाने के कारण पालिका के अधिकारियों के द्वारा भी इन्हें ज्यादा तवज्जो नहीं दी जाती है।

सूत्रों ने यह भी कहा कि नगर पालिका पर भारतीय जनता पार्टी काबिज है। भाजपा संगठन का पालिका के चुने हुए प्रतिनिधियों पर किसी तरह का नियंत्रण नहीं रह गया है। इसके अलावा विपक्ष में बैठी काँग्रेस को भी इस बात की परवाह नहीं रह गयी है कि नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। काँग्रेस का संगठन भी दीगर कामों में व्यस्त होने के कारण पार्षदों को भी पालिका को घेरने के लिये ताकीद करने से कतराता ही नज़र आता है।