आदर्श शहर बनने की राह में हैं हजार रोड़े!

 

 

(सादिक खान)

सिवनी (साई)। स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान सिवनी की रैंकिंग डेढ़ सैकड़ा शहरों के बाद ही आती है। सिवनी के निवासी यह शायद ही कभी सोच पायें कि उनका शहर आदर्श शहर बन पायेगा। दरअसल, स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान पीले रंग से दीवार पोतकर शहर को साफ सुथरा रखने की कवायद की जाती है।

सिवनी नगर पालिका परिषद का आलम यह है कि सड़कों पर जहाँ – तहाँ हाथ ठेले में सब्जी – फल बेचने वाले पथ विक्रेताओं और फेरी लगाने वालों के लिये कोई ठोस काम शहर में नहीं हुआ। इसके अलावा जगह – जगह लगे कचरे के ढेर भी पालिका की कार्यप्रणाली की चुगली करते दिख रहे हैं।

इन बिंदुओं से बनता है आदर्श शहर : जानकारों का कहना है कि किसी भी शहर को आधारभूत संरचनाओं के अलावा उस शहर में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार मूलक कार्यों को ध्यान में रखकर आदर्श शहर की श्रेणी में रखा जाता है। खासतौर से सामाजिक स्तर पर निचले तबके के रोजगार व उनके लिये बनाये नियमों का पालन भी उस निकाय को करना है, लेकिन शहर में आज भी सड़कों पर कारोबार करने वालों के लिये आदर्श परिस्थितियों का निर्माण नहीं किया गया। यहाँ तक कि विभागीय कामकाज में भी लापरवाही बरती गयी।

नगर पालिका के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि नगर पालिका परिषद को इस बात की कतई परवाह नहीं है कि वह स्वच्छता सर्वेक्षण में अव्वल स्थान प्राप्त करे या सिवनी को, आदर्श शहर की फेहरिस्त में शामिल करवाने की कवायद करे। इसके लिये नगर पालिका में चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ ही साथ सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को भी परवाह नहीं दिख रही है।