क्यों नहीं जारी होती एडवाईज़री

 

 

(शरद खरे)

बारिश का महीना हो, गर्मी या शीत ऋतु और या फिर मलेरिया, चिकन गुनिया, बर्ड फ्लू जैसी बीमारियां, पता नहीं क्यों स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय निकायों के द्वारा नागरिकों के लिये अखबारों के जरिये एडवाईज़री (क्या करें क्या न करें) जारी करने से परहेज ही किया जाता है। जानकारी के अभाव में नागरिक भ्रमित रहते हैं, जब समय निकल जाता है तब औपचारिकता के लिये (का वर्षा जब कृषि सुखानी की तर्ज पर) एडवाईज़री जारी की जाती है।

बारिश में पानी जमा होने से डेंगू, चिकन गुनिया और मलेरिया जैसे मच्छर जनित रोगों की आशंकाएं बलवती हो जाती हैं। मलेरिया विभाग हो या स्थानीय निकाय दोनों ही जिम्मेदार विभागों के द्वारा मच्छरों के शमन के उपाय नहीं किये जाते हैं। दशकों बीत गये पर घरों-घर जाकर विभागों के द्वारा दवाओं का छिड़काव नहीं किया गया है। हो सकता है कि सरकारी नुमाईंदों ने यह मान लिया होगा कि नागरिक अपने स्वास्थ्य के प्रति खुद ही सचेत हैं और मच्छरों से बचने के उपाय वे अपने स्तर पर करने में सक्षम हैं।

वर्तमान में देश भर में बर्ड फ्लू की आहट महसूस की जा रही है। सिवनी में भी प्रवासी पक्षियों का डेरा जमने लगा है। इसके चलते जिले में भी बर्ड फ्लू की आशंकाएं अगर हों तो इन्हें निर्मूल नहीं माना जा सकता है। अंग्रेजी की एक कहावत है प्रीकॉशन इज बेटर देन क्योर अर्थात सावधानी ही बेहतर है बजाय उपचार के।

अब तक स्वास्थ्य विभाग या स्थानीय निकायों के द्वारा बर्ड फ्लू से कैसे बचा जा सकता है इस बारे में किसी तरह की एडवाईज़री जारी न किया जाना आश्चर्य जनक ही माना जायेगा। सोशल मीडिया के जरिये तरह-तरह की बातें जिनमें अफवाहों का भी समावेश होता है, बहुत ही तेजी के साथ फैलती हैं। इससे कई बार प्रशासन के लिये मुसीबत का कारण भी ये बातें बन जाया करती हैं। अगर संबंधित विभागों के द्वारा समय रहते एडवाईज़री जारी कर लोगों को जागरूक कर दिया जाये तो इस तरह के मामलों में लोगों को परेशानी से बचाया जा सकता है।

जिले में जिस तरह से अफसरशाही के तेवर दिख रहे हैं उसे देखकर लग रहा है कि शासकीय सेवकों (विशेषकर अधिकारियों) ने यह सोच लिया है कि वे जनता के सेवक नहीं हाकिम या हुकूमत करने वाले हैं। जनता अपनी दुःख तकलीफ खुद ही हल कर लेगी, सरकारी कर्मचारी उन पर अपने फरमान जारी करते रहेंगे। अगर जनता कुछ विरोध करे तो शासकीय काम में बाधा का हथियार तो है ही उनके पास।

इस तरह की अराजकता की स्थिति उत्पन्न होने के पीछे ठोस वजह यही समझ में आ रही है कि चुने हुए सांसद और विधायक सहित सियासी दल इस तरह के मामलों में मौन ही हैं। इनके मौन का पूरा-पूरा लाभ अधिकारियों-कर्मचारियों के द्वारा उठाया जाकर जनता के साथ अन्याय ही किया जा रहा है। जनता बुरी तरह कराह रही है, पर उनकी सुध लेने की फुर्सत किसी को नहीं दिख रही है।